गांधी सेतु पर कार में मिले शव का सनसनीखेज खुलासा: 10 लाख की सुपारी और गैंगवार की कहानी

गांधी सेतु पर कार में मिले शव मामले का पुलिस ने खुलासा किया। यह 10 लाख की सुपारी किलिंग का मामला था, जिसमें समस्तीपुर में हुई मुठभेड़ के दौरान अपराधी की मौत हो गई थी। वारदात के लगभग 25 दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है।

गांधी सेतु पर कार में मिले शव का सनसनीखेज खुलासा: 10 लाख की

Vaishali - : वैशाली पुलिस ने 19 फरवरी 2026 को महात्मा गांधी सेतु के पिलर नंबर 1 के पास एक सफेद अल्टो कार से बरामद शव मामले का सफल उद्भेदन किया है। जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक खुद एक अपराधी था, जो अपने साथियों के साथ समस्तीपुर में एक हत्या करने गया था, लेकिन वहां हुई क्रॉस फायरिंग में वह खुद मारा गया।

सिम कार्ड ने खोला राज, जहानाबाद का निकला मृतक

घटना के बाद वैशाली एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ सदर-1 सुबोध कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। पुलिस को कार की तलाशी के दौरान एक सिम कार्ड मिला, जिससे मृतक की पहचान भानु कुमार (हुलासगंज, जहानाबाद) के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मृतक भानु पर पहले से तीन आपराधिक मामले दर्ज थे।

10 लाख की सुपारी और समस्तीपुर में मुठभेड़

पुलिस ने इस मामले में अभिषेक कुमार नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में अभिषेक ने खुलासा किया कि भानु और उसके साथियों को समस्तीपुर के एक स्थानीय व्यक्ति (अल्टू ईश्वर) की हत्या के लिए 10 लाख रुपये की सुपारी मिली थी। 17 फरवरी की शाम जब ये लोग समस्तीपुर के बहादुरपुर में हत्या करने पहुंचे, तो वहां दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई।

इलाज के दौरान मौत और शव ठिकाने लगाने की कोशिश

गोलीबारी में भानु और उसके एक अन्य साथी को गोली लगी। साथी उसे लेकर पटना के एक निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान भानु की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी भानु के शव को ठिकाने लगाने के लिए वैशाली के दियारा इलाके में ले जा रहे थे। वे शव को गांधी सेतु से नीचे फेंकना चाहते थे, लेकिन तभी उन्हें पुलिस की गश्ती गाड़ी दिखाई दे गई।

क्या कहते हैं एसडीपीओ

"पुलिस की गाड़ी देखते ही अपराधी डर गए और शव लदी अल्टो कार को पुल पर ही छोड़कर फरार हो गए। अपराधियों ने मृतक का मोबाइल भी साथ ले लिया था ताकि पहचान न हो सके, लेकिन एक सिम कार्ड गाड़ी में ही गिर गया, जिससे पूरा मामला खुल गया।" — सुबोध कुमार, एसडीपीओ सदर-1


रिपोर्ट - रिषभ कुमार