Bihar Flood: सारण में तटबंधों पर 130 करोड़ का खर्च, फिर भी टूटे बांध, उठे काम की गुणवत्ता पर सवाल

Bihar Flood: बाढ़ और तटबंध टूटने की घटनाओं ने सारण जिले में नदी तटबंधों की मजबूती और उनकी निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...

Bihar Flood: सारण में तटबंधों पर 130 करोड़ का खर्च, फिर भी ट
तटबंधों की गुणवत्ता पर सवाल- फोटो : reporter

Bihar Flood: बाढ़ और तटबंध टूटने की घटनाओं ने सारण जिले में नदी तटबंधों की मजबूती और उनकी निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाढ़ से बचाव और नदी कटाव रोकने के नाम पर पिछले दो वर्षों में करीब 129.95 करोड़ रुपये के कार्यों का प्रावधान किया गया, लेकिन सितंबर में जिले के कई इलाकों में तटबंध और रिंग बांध क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद बाढ़ का पानी तेजी से गांवों की ओर फैल गया और बड़ी आबादी को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा।

सबसे अधिक चर्चा मकेर के हैजलपुर तटबंध को लेकर है। इस तटबंध की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण पर पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद इसी इलाके में तटबंध के क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ का पानी आसपास के गांवों की तरफ फैल गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भारी-भरकम राशि खर्च किए जाने के बाद भी संवेदनशील तटबंधों को बाढ़ के दबाव से सुरक्षित क्यों नहीं रखा जा सका।

आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में तटबंधों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 40.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें मकेर के हैजलपुर-बैकुंठपुर-लखनिया, सोनपुर के बलिटोला-सबलपुर, दिघवारा-अकीलपुर, छपरा सदर के कोटवा-रामपुर-कुटुबपुर, मांझी के फुलवरिया और दुवौंडीह समेत कई तटबंध शामिल थे।

वहीं 2026 में तटबंधों और नदी कटावरोधी कार्यों के लिए 89.56 करोड़ रुपये के कार्यों का टेंडर जारी किया गया। इसमें मकेर के हैजलपुर तटबंध के लिए करीब 20.57 करोड़ रुपये, सोनपुर के बलिटोला-सबलपुर के लिए 57.55 करोड़ रुपये, छपरा सदर के कोटवा-रामपुर-कुटुबपुर के लिए 7.65 करोड़ रुपये और दिघवारा के मलखाचक के लिए करीब 3.72 करोड़ रुपये के कार्य शामिल हैं।

यानी दो वर्षों में करीब 130 करोड़ रुपये तटबंधों को मजबूत करने और कटाव रोकने पर लगाए गए। इसके बावजूद सितंबर में मकेर के हैजलपुर और बाघाकोल, तरैया और पानापुर के सरौजा-भगवानपुर समेत कई स्थानों पर तटबंध या रिंग बांध क्षतिग्रस्त हुए।

इन घटनाओं ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और तटबंधों के स्थायी समाधान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत इस बात की है कि सिर्फ बाढ़ के बाद मरम्मत पर जोर देने के बजाय संवेदनशील हिस्सों की लगातार निगरानी, समय रहते मरम्मत और स्थायी सुदृढ़ीकरण की व्यवस्था हो। वरना हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बाढ़ के मौसम में तटबंध टूटने और गांवों में पानी घुसने की तस्वीर दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी