Bihar Politics: 62 मुकदमों के रिकॉर्ड वाले बाहुबली अनंत सिंह फिर जाएंगे जेल या बरकरार रहेगी जमानत? दुलारचंद यादव की पहली बरसी पर सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

Bihar Politics: सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द करने की याचिका पर अहम सुनवाई होनी है। ...

Anant Singh
अनंत सिंह फिर जाएंगे जेल! - फोटो : X

Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों भूचाल सा आ गया है। जनता दल यूनाइटेड के एमएलसी उम्मीदवार नीरज कुमार के मुखर विरोध के बाद, मोकामा के बाहुबली जदयू से निष्कासित विधायक अनंत सिंह पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। दो दिनों के भीतर हुई राजनीतिक और कानूनी उथल-पुथल ने बाहुबली छोटे सरकार के  राजनीतिक वजूद को गहरे संकट में डाल दिया है। रविवार की शाम को ही जेडीयू ने सख्त रुख अपनाते हुए अनंत सिंह और उनकी पूर्व विधायक पत्नी नीलम देवी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके तुरंत बाद, सोमवार की सुबह नीलम देवी को बीस सूत्री समिति से भी बर्खास्त कर दिया गया, जिससे उनका मंत्री का रुतबा भी छिन गया। कहर यहीं नहीं थमा, सोमवार की शाम उन्हें उस सरकारी बंगले को भी खाली करने का फरमान मिल गया, जिस पर अनंत सिंह का लंबे समय से कब्जा था।अब निगाहें आगामी शुक्रवार, यानी 30 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब सुप्रीम कोर्ट में दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को रद्द करने की याचिका पर अहम सुनवाई होनी है। विडंबना यह है कि 30 अक्टूबर वही तारीख है जब दुलारचंद यादव की पहली बरसी भी है, जिनकी हत्या वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी।

  देश की सबसे बड़ी अदालत में सुनवाई 

बता दें  साल 2025 के विधानसभा चुनाव में  में अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर मैदान में थे, जबकि जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में मोकामा टाल के जाने-माने दबंग दुलारचंद यादव प्रचार कर रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए, और इसी गहमागहमी में दुलारचंद यादव की निर्मम हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई और उन्हें जेल भेज दिया गया। हालांकि, सलाखों के पीछे रहते हुए भी उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की और मार्च माह में पटना हाईकोर्ट से जमानत पाकर बाहर आए थे। इस रिहाई के खिलाफ दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी मांग है कि अनंत सिंह की जमानत खारिज कर उन्हें फौरन जेल भेजा जाए। 

बिहार सरकार का हलफनामा

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल मुकदमे में बिहार सरकार के हलफनामे ने अनंत सिंह की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। राज्य सरकार ने गत 24 अक्टूबर को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें उनके खिलाफ काफी सख्त टिप्पणियां दर्ज हैं। सरकार ने अदालत को अवगत कराया है कि पुलिसिया तफ्तीश और उच्चाधिकारियों (एसडीपीओ और एसपी) के स्तर पर हुई सुपरविजन में अनंत सिंह और अन्य अभियुक्तों पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इसी आधार पर जनवरी 2026 में उनके साथ-साथ मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई पर लोगों की निगाहें टिकी है।इस दिन हीं तय होगा कि मोकामा के बाहुबली जेल जाएंगे या बेल बरकरार रहेगी

अनंत सिंह का राजनीतिक भविष्य

याचिकाकर्ता दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने अपनी याचिका में यह भी रेखांकित किया था कि पटना हाईकोर्ट ने जमानत देते वक्त अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास की अनदेखी की। वहीं, राज्य सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को यह लिखित जानकारी दी है कि अनंत सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद खौफनाक रहा है, जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों के तहत कुल 62 आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। बहरहाल, दादा की शहादत का इंसाफ दिलाने की जिद पर अड़े पोते नीरज कुमार की यह कानूनी लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां आने वाले दिन अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेंगे।