Bihar Bureaucracy: सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव की कुर्सी पर किसकी होगी ताजपोशी? रेस में संजय कुमार से लेकर सीके मिश्रा तक के नाम, इन IAS पर भी टिकी निगाहें

Bihar Bureaucracy: बिहार की सत्ता और नौकरशाही में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा के केंद्र में है-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी अब किस अधिकारी को मिलेगी?

Samrat Choudhary Principal Secretary
कुर्सी पर किसकी होगी ताजपोशी? - फोटो : X

Bihar Bureaucracy: बिहार की सत्ता और नौकरशाही में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा के केंद्र में है-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी अब किस अधिकारी को मिलेगी? दीपक कुमार को इस पद से हटाए जाने के बाद संभावित नामों को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, नई नियुक्ति को लेकर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

30 सितंबर 2026 को दीपक कुमार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद से हटाकर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने करीब आठ साल तीन महीने यानी 99 महीने तक इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को संभाला। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी इस पद पर किसी सेवारत अधिकारी को नियुक्त करते हैं या किसी अनुभवी पूर्व आईएएस अफसर को बड़ी भूमिका सौंपते हैं।

क्या नीतीश कुमार का प्रशासनिक मॉडल अपनाएंगे सम्राट?

बिहार में नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रधान सचिव और सलाहकार की भूमिका काफी प्रभावशाली रही। प्रशासनिक फैसलों के समन्वय और सरकारी कामकाज की निगरानी के लिए विकसित इस व्यवस्था में पूर्व आईएएस अंजनी कुमार सिंह और बाद में दीपक कुमार ने अहम जिम्मेदारियां निभाईं।अब चर्चा है कि सम्राट चौधरी भी इसी तर्ज पर अनुभवी अधिकारी को अपने साथ जोड़ सकते हैं। मुख्यमंत्री के करीबी लोगों और सचिवालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से ऐसी संभावनाएं जताई जा रही हैं, लेकिन अंतिम निर्णय का इंतजार है।

संजय कुमार का नाम क्यों चर्चा में?

संभावित नामों में बिहार कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी संजय कुमार का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वे 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे। केंद्र सरकार में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के रूप में उनकी आखिरी जिम्मेदारी रही।

संजय कुमार को मुख्यमंत्री सचिवालय और राज्य सरकार के कामकाज का अनुभव भी है। जनवरी 2015 से जनवरी 2018 के बीच झारखंड में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के प्रधान सचिव के रूप में काम किया था। प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक नेतृत्व के साथ समन्वय की उनकी क्षमता को संभावित दावेदारी के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

राजेश भूषण और सीके मिश्रा भी अनुभवी विकल्प

बिहार कैडर के 1987 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी राजेश भूषण भी अनुभवी प्रशासनिक चेहरों में शामिल हैं। केंद्र सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय में उनकी भूमिका खास तौर पर चर्चा में रही। संक्रमण की दूसरी लहर के समय अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और टीकाकरण अभियान से जुड़े प्रशासनिक कामों में उनकी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण थी।

वहीं, 1983 बैच के आईएएस अधिकारी सीके मिश्रा ने बिहार और केंद्र, दोनों जगह कई अहम विभागों में सेवाएं दी हैं। स्वास्थ्य, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और पर्यटन जैसे विभागों में काम करने के अलावा केंद्र सरकार में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। पीएमओ के साथ कामकाज का अनुभव और विभिन्न मंत्रालयों में उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें संभावित विकल्पों की चर्चा में शामिल करती है।

त्रिपुरारी शरण और अमरजीत सिन्हा के नाम भी चर्चा में

पूर्व मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण का नाम भी संभावित दावेदारों के संदर्भ में लिया जा रहा है। मई 2021 में बिहार का मुख्य सचिव बनने के बाद उन्हें दो बार तीन-तीन महीने का सेवा विस्तार मिला था। दिसंबर 2021 में वे सेवानिवृत्त हुए। उस समय सम्राट चौधरी राज्य सरकार में मंत्री थे और दोनों के बीच प्रशासनिक समन्वय की चर्चा होती रही। त्रिपुरारी शरण बिहार के मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर भी रहे; उनका कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को पूरा हुआ।

इसके अलावा, 1983 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमरजीत सिन्हा का नाम भी अनुभवी अधिकारियों की सूची में लिया जा सकता है। उन्होंने बिहार सरकार में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में काम किया। केंद्र में सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका रही।

अब फैसले पर टिकी निगाहें

इन अधिकारियों के नामों को लेकर चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इनमें से किसी की नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने चुनौती ऐसे अधिकारी का चयन करने की होगी, जो प्रशासनिक अनुभव के साथ सरकार की प्राथमिकताओं को तेजी से जमीन पर उतारने में मदद कर सके।अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री सचिवालय की इस अहम कुर्सी पर किसे जिम्मेदारी मिलती है और क्या नई व्यवस्था में नीतीश कुमार के प्रशासनिक मॉडल की झलक दिखाई देती है।

ब्यूरो रिपोर्ट