दो कुर्सियों के बादशाह 30 मार्च को एमएलसी पद से नहीं देंगे इस्तीफा! पढ़िए सीएम नीतीश कुमार की विदाई की टाइमिंग का पूरा सियासी गणित

Bihar Politics: बिहार की सियासत वेट एंड वॉच मोड में है जहां संविधान की धाराएं, सरकारी गजट और शुभ मुहूर्त तीनों मिलकर तय करेंगे कि नीतीश कुमार आखिर कब मुख्यमंत्री की कुर्सी को अलविदा कहेंगे।

When Will Bihar CM Step Down Nitish Kumar Exit Timing Puzzle
बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी कब होगी खाली ? - फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की फिजाओं में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है हुजूर, आखिर कुर्सी कब खाली होगी? सूबे के सियासी उस्ताद नीतीश कुमार राज्यसभा के मुसाफिर तो बन चुके हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की मसनद अब भी मजबूती से थामे हुए हैं। यही दोहरा किरदार अब सियासत के गलियारों में हलचल और बेचैनी की बड़ी वजह बन गया है।

दरअसल, सियासत की शतरंज पर चली गई यह चाल जितनी पेचीदा है, उतनी ही दिलचस्प भी। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 101(2) और प्रोहिबिशन ऑफ सिमुल्टेनियस मेंबरशिप रूल्स 1950 साफ कहते हैं कि कोई भी शख्स एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रह सकता। लेकिन यहां असली पेच गजट नोटिफिकेशन में फंसा हुआ है।

कानून का तकाजा यह है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे जब तक सरकारी गजट में प्रकाशित नहीं होते, तब तक 14 दिन की इस्तीफे वाली घड़ी शुरू नहीं होती। यानी जब तक गजट जारी नहीं होता, तब तक नीतीश कुमार तकनीकी तौर पर दो नावों की सवारी कर सकते हैं और फिलहाल वही हो भी रहा है। 16 मार्च को जीत का परचम लहराने के बावजूद अब तक कोई इस्तीफा नहीं आया है। इस खामोशी ने सियासी अटकलों का बाजार और गर्म कर दिया है। 

वहीं, बिहार की राजनीति में सिर्फ आंकड़े ही नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्र भी मायने रखते हैं। चर्चा है कि 13 अप्रैल तक खरमास का साया है, जिसमें नई शुरुआत से परहेज किया जाता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल के बाद ही सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ होगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि 30 मार्च तक गजट जारी हो जाता है और उसके 14 दिन के भीतर नीतीश इस्तीफा नहीं देते, तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता पर संकट आ सकता है। यही वजह है कि  4 अप्रैल तक के उनके व्यस्त कार्यक्रम (जिसमें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के साथ कार्यक्रम शामिल हैं) को उनकी विदाई पारी के तौर पर देखा जा रहा है।

चर्चा है कि नीतीश कुमार एक ही झटके में सब कुछ नहीं छोड़ेंगे। उनकी रणनीति दो किस्तों वाली हो सकती है। पहली किस्त में  वह विधान परिषद (MLC) से इस्तीफा देकर पूरी तरह राज्यसभा सदस्य बनेंगे। दूसरी किस्त में मुख्यमंत्री पद का त्यागपत्र वह तभी देंगे जब भाजपा के साथ 'अगले उत्तराधिकारी' का नाम पूरी तरह फाइनल हो जाएगा और खरमास (13 अप्रैल) का साया हट जाएगा।

नीतीश कुमार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब वह दिल्ली की ओर रुख करें, तो पटना में उनकी विरासत और गठबंधन की साख दोनों सलामत रहें। बहरहाल अभी गजट प्रकाशित नहीं हुआ है तो नीतीश पर अभी एमएलसी के पद से इस्तीफा देने की जरुरत नहीं है।

बहरहाल बिहार की सियासत वेट एंड वॉच मोड में है जहां संविधान की धाराएं, सरकारी गजट और शुभ मुहूर्त तीनों मिलकर तय करेंगे कि नीतीश कुमार आखिर कब मुख्यमंत्री की कुर्सी को अलविदा कहेंगे।