Bihar News: बिहार में खनिज माफियाओं की अब खैर नहीं! सरकार का 'सर्जिकल स्ट्राइक', नया सिस्टम देख उड़ जाएंगे होश

Bihar News: बिहार में अवैध खनन और खनिजों की हेराफेरी पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार ने अपनी घेराबंदी और सख्त कर दी है। अब राज्य की सड़कों पर दौड़ने वाले खनिज वाहनों की मनमानी नहीं चलेगी। विभाग ने एक ऐसी अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली तैयार की है।

खनिज माफियाओं की खैर नहीं!
खनिज माफियाओं की खैर नहीं!- फोटो : social media

Bihar News: बिहार में अवैध खनन और खनिजों की हेराफेरी पर लगाम लगाने के लिए नीतीश सरकार ने अपनी घेराबंदी और सख्त कर दी है। अब राज्य की सड़कों पर दौड़ने वाले खनिज वाहनों की मनमानी नहीं चलेगी। विभाग ने एक ऐसी अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली तैयार की है, जो न केवल वाहनों की हर हरकत पर नजर रखेगी, बल्कि फर्जी लोकेशन दिखाकर अधिकारियों को गुमराह करने वाले गिरोहों का भी पर्दाफाश करेगी। इस नई व्यवस्था के तहत, अब जीपीएस (GPS) से लेकर डिजिटल ई-चालान तक की प्रक्रिया को इतना कड़ा बना दिया गया है कि रत्ती भर भी गड़बड़ी होते ही मुख्यालय में अलार्म बज जाएगा। 

सरकार का मास्टर प्लान 

दरअसल, बिहार में खनिज परिवहन की निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार अब तकनीकी स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में है। हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वाहन ट्रैकिंग सिस्टम से छेड़छाड़ के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कई अहम सुझाव सामने आए। यह बैठक खान एवं भू-तत्व विभाग के स्तर पर आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों और अधिकारियों ने मौजूदा सिस्टम की खामियों पर विस्तार से चर्चा की।

फर्जी लोकेशन पर रोक की तैयारी

बैठक में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि ने बताया कि वर्तमान ट्रैकिंग सिस्टम में समर्पित इंटरनेट रेंज नहीं होने के कारण वाहनों की वास्तविक लोकेशन छुपाने या बदलने की आशंका बनी रहती है। इससे अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिया गया कि वाहन ट्रैकिंग डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन के लिए अलग और सुरक्षित इंटरनेट रेंज उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाए।

डेटा सुरक्षा पर भी जोर

बैठक में खनन से जुड़े सभी सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि डेटा सुरक्षा के लिए कड़े और प्रभावी उपाय लागू किए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तकनीकी खामी का समय रहते समाधान हो सके।

ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम की तैयारी

नई व्यवस्था में ऐसा सिस्टम विकसित करने पर भी चर्चा हुई, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि, नियम उल्लंघन या छेड़छाड़ की स्थिति में स्वतः अलर्ट जनरेट हो और संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचना मिल सके। अधिकारियों का मानना है कि इन तकनीकी सुधारों के लागू होने से खनिज परिवहन की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग अधिक विश्वसनीय बनेगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। संकेत दिए गए हैं कि विभाग जल्द ही इस दिशा में ठोस दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, जिससे तकनीक के जरिए निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाया जा सके।