धांधली के खुलासे के बाद दारोगा मुख्य परीक्षा रद्द : 146 दिनों में तीसरा बड़ा पेपर लीक, क्या है वजह !
हर बार परीक्षा के बाद आयोग शुरुआती चरण में गड़बड़ी से इनकार करता है, लेकिन अभ्यर्थियों के आंदोलनों और EOU व SIT जैसी जांच एजेंसियों के ठोस सबूतों के बाद अंततः परीक्षाएं रद्द करनी पड़ती हैं। आखिरकार इसके पीछे वजह है क्या....
Patna : बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा 1,799 पदों के लिए 27 मई 2026 को आयोजित की गई दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) बहाली की मुख्य परीक्षा को आखिरकार रद्द कर दिया गया है। परीक्षा के दिन से ही अभ्यर्थियों द्वारा पेपर लीक के आरोप लगाए जा रहे थे और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जा रहा था। हालांकि आयोग प्रारंभिक चरण में गड़बड़ी से इनकार करता रहा, लेकिन मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंपे जाने और पुख्ता सबूत सामने आने के बाद आयोग ने 23 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से परीक्षा रद्द करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
वीक्षक ने 6 मिनट में व्हाट्सएप पर लीक किया था पेपर
दरोगा बहाली परीक्षा में हुई धांधली का बड़ा खुलासा पूर्णिया के साइबर थाने द्वारा दाखिल केस डायरी और चार्जशीट से हुआ है। चार्जशीट के अनुसार, पूर्णिया स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार ने परीक्षा शुरू होने के बाद अनुपस्थित अभ्यर्थियों के प्रश्नपत्रों की अपने मोबाइल से तस्वीरें खींचीं। दोपहर 2.44 से 2.50 बजे के बीच महज 6 मिनट के भीतर ये तस्वीरें उसके भाई पप्पू कुमार को व्हाट्सएप पर भेजी गईं। पुलिस ने 25 जुलाई को आरोपी वीक्षक के खिलाफ 'द बिहार पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024' के तहत चार्जशीट दाखिल की, जिसके आधार पर अब EOU संगठित सिंडिकेट पर नया केस दर्ज करने जा रही है।
146 दिनों में तीसरा बड़ा पर्चा रद्द, गिरोह की गहरी पैठ
बिहार में पिछले 146 दिनों के भीतर धांधली के कारण रद्द होने वाली यह तीसरी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा है। इससे पूर्व 1 मई को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने भी सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) और स्वच्छता अधिकारी की परीक्षाएं रद्द की थीं। एसआईटी (SIT) जांच में सामने आया था कि माफियाओं ने 30 से 35 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी लेकर परीक्षा से 3 घंटे पहले ही उत्तर कुंजी (Answer Key) बांट दी थी। इस खेल में बायोमेट्रिक हाजिरी का ठेका लेने वाली कंपनी 'साईं एडुकेयर' के संदिग्ध कर्मचारियों और माफिया के फर्जी परीक्षार्थियों का संगठित नेटवर्क उजागर हुआ था।
परीक्षा सुधार समिति का गठन और 10 साल की जेल का प्रावधान
बार-बार होते पेपर लीक पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर 1 सितंबर को 'परीक्षा सुधार समिति' का गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस हरीश कुमार कर रहे हैं। यह समिति BPSSC, BPSC और BSSC सहित पांचों प्रमुख चयन आयोगों की कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक और पारदर्शिता लाने के लिए नए मानक तय करेगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने भी 27 जुलाई 2026 को 'सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026' पेश किया है, जिसमें पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
निजी एजेंसियों पर निर्भरता और जवाबदेही का अभाव
बिहार में भर्ती परीक्षाओं के बार-बार लीक होने के पीछे परीक्षा एजेंसियों, कोचिंग सेंटरों और निजी वेंडरों का मजबूत आपराधिक गठजोड़ मुख्य वजह माना जा रहा है। प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग, पैकेजिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन का काम निजी फर्मों के जिम्मे होना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध साबित हो रहा है। इसके साथ ही, पिछले 9 वर्षों में 13 परीक्षाओं के पेपर लीक होने के बावजूद परीक्षा आयोगों के शीर्ष अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय न होने से व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।