बिहार का मुख्यमंत्री बनने से पहले इन विभागों में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं सम्राट चौधरी, जानें कैसा रहा उनका कार्यकाल
सम्राट चौधरी बने बिहार भाजपा विधायक दल के नेता। जानें 1999 में कृषि मंत्री से लेकर 2026 में मुख्यमंत्री बनने तक का उनका पूरा राजनीतिक सफर और प्रमुख उपलब्धियाँ।
Patna - बिहार भाजपा के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य को भरने के लिए भाजपा ने अपने सबसे भरोसेमंद और आक्रामक चेहरे पर दांव लगाया है। सम्राट चौधरी अब बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालेंगे। पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव आते ही विधायकों ने भारी उत्साह के साथ इसका समर्थन किया, जो बिहार भाजपा में उनके बढ़ते कद को दर्शाता है।
1999 से शुरू हुआ मंत्री पद का ऐतिहासिक सफर
सम्राट चौधरी का सत्ता से नाता दशकों पुराना है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत लालू-राबड़ी युग में की थी। साल 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में वे पहली बार मंत्री बने थे। महज 25 साल की उम्र में कृषि विभाग (मेट्रोलॉजी और हॉर्टिकल्चर) की जिम्मेदारी संभालकर उन्होंने इतिहास रच दिया था। हालांकि, उस समय उनकी उम्र को लेकर उठे विवाद के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन उसी घटना ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक 'लड़ाकू' नेता के रूप में स्थापित कर दिया था।
विभिन्न सरकारों में भारी-भरकम विभागों का अनुभव
मुख्यमंत्री बनने से पहले सम्राट चौधरी ने प्रशासन और नीति-निर्धारण का व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। उन्होंने जीतन राम मांझी की सरकार में नगर विकास एवं आवास मंत्री के रूप में कार्य किया, जबकि नीतीश कुमार के साथ एनडीए सरकार में वे पंचायती राज मंत्री रहे। उनकी प्रशासनिक क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण नवंबर 2025 में मिला, जब उन्हें उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ गृह विभाग की जिम्मेदारी दी गई। पिछले दो दशकों से गृह विभाग हमेशा नीतीश कुमार के पास रहा था, लेकिन सम्राट ने इसे हासिल कर अपनी राजनीतिक धमक साबित की।
'मुरैठा' संकल्प और नीतीश को दी गई सीधी चुनौती
सम्राट चौधरी की पहचान केवल उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके अडिग संकल्पों से भी है। जब नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़ राजद से हाथ मिलाया था, तब सम्राट ने सिर पर 'मुरैठा' (पगड़ी) बांधकर कसम खाई थी कि जब तक वे नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल नहीं कर देते, तब तक अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे। उनके इस आक्रामक तेवर और लगातार संघर्ष ने उन्हें बिहार भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया। आज जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ रहे हैं, तो इसे उनके उसी संघर्ष की परिणति माना जा रहा है।
भाजपा का 'मिशन 2026' और नेतृत्व की नई दिशा
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री के रूप में चुना जाना भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। पार्टी अब बिहार में 'पिछड़ा बनाम पिछड़ा' की राजनीति के जरिए अपने दम पर बहुमत हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2026 के आगामी चुनावों को देखते हुए सम्राट चौधरी को आगे करना यह स्पष्ट संकेत है कि भाजपा अब बिहार में छोटे भाई की भूमिका से पूरी तरह बाहर निकल चुकी है। जनता के बीच उनकी पकड़ और कुशल नेतृत्व क्षमता के दम पर पार्टी अब राज्य में सुशासन और विकास के नए एजेंडे को लागू करने के लिए तैयार है।
| कार्यकाल | सरकार/मुख्यमंत्री | विभाग/पद | मुख्य विवरण |
| 1999 | राबड़ी देवी (RJD) | कृषि मंत्री (मेट्रोलॉजी और हॉर्टिकल्चर) | भारत के सबसे युवा मंत्रियों में से एक बने। |
| 2014 | जीतन राम मांझी (JDU) | शहरी विकास एवं आवास मंत्री | मांझी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। |
| 2021 | नीतीश कुमार (NDA-BJP) | पंचायती राज मंत्री | बीजेपी कोटे से नीतीश कैबिनेट में शामिल हुए। |
| 2024 (जनवरी) | नीतीश कुमार (NDA-BJP) | उपमुख्यमंत्री | एनडीए की वापसी पर डिप्टी सीएम बने। |
| 2025 (नवंबर) | नीतीश कुमार (NDA-BJP) | गृह मंत्री (उपमुख्यमंत्री के साथ) | बिहार के इतिहास में पहली बार बीजेपी को गृह विभाग मिला और सम्राट चौधरी इसके प्रभारी बने। |
| 2026 (अप्रैल) | बीजेपी नेतृत्व (NDA) | मुख्यमंत्री (नामित/चुने गए) | बीजेपी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद अब मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालेंगे। |