Bihar News: बिहार की सियासत में उबाल, पढ़िए सुधाकर सिंह और डीजी कुंदन कृष्णन के तल्ख विवाद का क्या है जड़

Bihar News: बिहार की सियासत में इस वक्त एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। ..

RJD MP Sudhakar Singh and Bihar DG Kundan Krishnan Legal Cla
सुधाकर सिंह और डीजी कुंदन कृष्णन के तल्ख विवाद - फोटो : X

Bihar News: बिहार की सियासत में इस वक्त एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल  के सांसद सुधाकर सिंह और बिहार पुलिस के तेजतर्रार डीजी (ऑपरेशन्स) कुंदन कृष्णन के दरमियान छिड़ी जंग अब और अधिक संगीन होती जा रही है। यह पूरा मामला भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर और उसके बाद की पुलिसिया कार्रवाई से शुरू हुआ था, जिसकी गूंज अब राजधानी पटना के गलियारों से लेकर हुकूमत के दर तक सुनाई दे रही है।

मानहानि का नोटिस और कानूनी शिकंजा

इस तनातनी की मुख्य वजह वह कानूनी नोटिस है, जो 6 अक्टूबर को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने अपने निजी वकील के जरिए राजद सांसद सुधाकर सिंह को भेजा था। नोटिस में मांग की गई थी कि सांसद 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें, वरना उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी कार्रवाई करते हुए पांच करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

सांसद सुधाकर सिंह ने इस मामले में 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सचिवालय को एक खत लिखकर भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच कराने, पुलिस कमान की जवाबदेही तय करने और जनहित के मुद्दों को उठाने की वजह से भेजे गए इस नोटिस पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए है।

कुंदन कृष्णन का दो-टूक रुख

विवाद बढ़ने के बावजूद 1994 बैच के सख्त आईपीएस कुंदन कृष्णन अपने स्टैंड पर पूरी तरह कायम हैं। उनका कहना है कि निजी लीगल नोटिस भेजने के वास्ते गृह विभाग की इजाजत लेना जरूरी नहीं है और उन्होंने इसके लिए कायदे-कानूनों की पूरी फेहरिस्त खुद जांची है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब वह सांसद के खिलाफ सिविल सूट (दीवानी मुकदमा) दायर करने जा रहे हैं, जिसके लिए वह कायदे से गृह विभाग से अनुमति लेंगे।

वर्तमान में कुंदन कृष्णन बिहार पुलिस में डीजी ऑपरेशन्स के ओहदे पर हैं और उन्हें एसटीएफ तथा स्पेशल ब्रांच की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह मार्च 2029 में सेवानिवृत्त (रिटायर) होंगे। अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए मशहूर कृष्णन साल 2006 में तब खासी सुर्खियों में आए थे, जब पटना के सिटी एसपी के रूप में उन्होंने बाहुबली नेता आनंद मोहन से सीधी टक्कर ली थी। नियमों की धज्जियां उड़ाकर होटल में ठहरे आनंद मोहन को उन्होंने अपनी सूझबूझ और सख्ती से वापस सलाखों के पीछे भेजकर अपनी धाक जमाई थी।छपरा जेल कांड में उनकी भूमिका की खूब प्रशंसा हुई थी।

 डीजीपी की कुर्सी और सियासी दांव

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि हुकूमत इस काबिल और तेजतर्रार अफसर को राज्य का अगला स्थायी डीजीपी बनाना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के मुताबिक, स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल का होता है और इसके लिए शीर्ष तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे जाते हैं। वहीं सूत्रों के अनुसार कुछ लोग इनकी राह का कांटा भी बन रहे हैं। बहरहाल इस गर्मागर्म तनातनी ने सूबे की सियासत और पुलिसिया तंत्र में हलचल पैदा कर दी है, जिसकी हर एक तपिश पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

पुष्कर प्रवीण की रिपोर्ट