ED के डर से FaceTime और Telegram पर 'आकाओं' को देने लगा रिशु श्री खुदकुशी की धमकी!पूरी इनसाइड स्टोरी

बिहार के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप। 20 से अधिक IAS अधिकारियों को उंगली पर नचाने वाले दलाल रिशु श्री पर ED और SVU का शिकंजा। 265 करोड़ की अवैध संपत्ति, फर्जी मेडिकल और खुदकुशी की धमकी की पूरी इनसाइड स्टोरी।

ED के डर से FaceTime और Telegram पर 'आकाओं' को देने लगा रिशु
बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई और ED की रडार पर आया रिशु श्री- फोटो : Reporter

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में बिहार के प्रशासनिक गलियारों को हिलाकर रख देने वाला एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के 20 से अधिक आईएएस (IAS) अधिकारियों को अपनी उंगली पर नचाने वाले महादलाल 'रिशु श्री' का पूरा सिंडिकेट अब बेनकाब हो चुका है। टेंडर मैनेज करने से लेकर अफसरों की काली कमाई को खपाने वाले रिशु श्री की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। आइए जानते हैं इस महाघोटाले की पूरी इनसाइड स्टोरी।

कानूनी शिकंजा पूरी तरह कसने के बाद रिशु श्री बुरी तरह घबरा गया। ईडी ने पटना एसएसपी को पत्र भेजकर अलर्ट किया है कि वह जेल जाने और राज खुलने के डर से फेसटाइम (FaceTime) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे सुरक्षित ऐप्स के जरिए अपने आकाओं (प्रभावशाली अधिकारियों) को लगातार आत्महत्या करने की धमकी देने लगा। वह ऐसा इसलिए करने लगा ताकि पर्दे के पीछे बैठे उसके बड़े मददगार उसे बचाने के लिए कोई तिकड़म लगाएं। यही नहीं, ईडी के समन और पूछताछ से भागने के लिए उसने फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का भी सहारा लिया था। फिलहाल, ईडी इस पूरे नेक्सस की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।


20 से ज्यादा IAS अफसरों का 'आका' और 265 करोड़ का साम्राज्य

मूल रूप से बिहार के सारण जिले का रहने वाला रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा तकनीकी रूप से एक दलाल है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था में उसका दखल किसी बेहद ताकतवर मंत्री जैसा था। ईडी की जांच के मुताबिक, रिशु श्री ने महज कुछ सालों के भीतर 265.73 करोड़ रुपये की अकूत अवैध संपत्ति खड़ी कर ली। इस काली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी करीब 185.25 करोड़ रुपये उसे 'स्वच्छ गंगा मिशन' से जुड़े कार्यों के जरिए मिला था। इस पूरे पैसे के लेन-देन के लिए देश-विदेश में बड़े पैमाने पर 'हवाला नेटवर्क' का इस्तेमाल किया गया।


टेंडर से पहले लीक होती थी जानकारी, पुणे के बाद देश का दूसरा बड़ा सेंटर भी रडार पर

जांच में सामने आया है कि रिशु श्री को सरकारी टेंडर जारी होने से पहले ही उसकी सारी गोपनीय और महत्वपूर्ण शर्तें मालूम हो जाती थीं। इसके बाद वह शर्तों को अपने पसंदीदा ठेकेदारों के हिसाब से कस्टमाइज करवा देता था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सुपौल के बीरपुर में बना फिजिकल मॉडलिंग सेंटर है। लगभग 125 करोड़ की लागत से बना 20 एकड़ का यह सेंटर नदियों के हाइड्रोलिक गुणों का अध्ययन करने के मामले में पुणे के बाद देश का दूसरा सबसे विशिष्ट संस्थान है। साल 2018 में जब तत्कालीन जल संसाधन विभाग के सचिव और वरिष्ठ आईएएस संजीव हंस के कार्यकाल में इसका टेंडर निकला, तो रिशु श्री ने बैकडोर से ऐसी शर्तें रखवाईं कि ठेका उसकी पसंदीदा अहमदाबाद की कंपनी 'सेवरोक्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड' को मिल गया। बाद में रिशु ने अपने ही स्टाफ की कंपनी 'मातृसेवा कंस्ट्रक्शन' को इसका सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलवाकर 8 से 10 फीसदी का मोटा कमीशन जेब में डाल लिया।


अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का रेट कार्ड और 25 लाख की घूस

रिशु श्री का रसूख सिर्फ टेंडर मैनेज करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह बिहार सरकार के कई विभागों में यह तय करता था कि किस विभाग का सचिव कौन बनेगा। किस शहर में कौन सा अधिकारी नगर आयुक्त की कुर्सी पर बैठेगा, यह भी वही तय करता था। जांच रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला दावा किया गया है कि मुमुक्षु चौधरी नामक व्यक्ति ने यह स्वीकार किया है कि सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए बड़े अधिकारियों को बाकायदा 25 लाख रुपये की रिश्वत पहुंचाई गई थी।


अफसरों को 'फॉरेन ट्रिप' का लालच और मजबूत संबंध

अधिकारियों को अपने जाल में फंसाए रखने और मनमुताबिक फैसले करवाने के लिए रिशु श्री बेहद शातिर तरीकों का इस्तेमाल करता था। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, वह रडार पर आए आईएएस अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों की महंगी विदेश यात्राओं (Foreign Trips) का पूरा खर्च खुद उठाता था। इन आलीशान यात्राओं के जरिए वह अफसरों से अपने संबंध इतने मजबूत कर लेता था कि बाद में करोड़ों के टेंडरों को आसानी से प्रभावित किया जा सके।