Patna Traffic Police: पटना ट्रैफिक पोस्ट पर कैश का खेल? तारामंडल के पास अवैध वसूली के आरोप से मचा हड़कंप, कैमरों में कैद हो सकती है पूरी हकीकत!

Patna Traffic Police: पटना के एक चर्चित ट्रैफिक प्वाइंट को लेकर ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने ट्रैफिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Patna Traffic Post Faces Bribery Claims Over Rule Violations
पटना ट्रैफिक पोस्ट पर कैश का खेल? - फोटो : reporter

Patna Traffic Police: राजधानी पटना में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए कई तरह के जुर्माने और चालान की व्यवस्था है। नियमों के उल्लंघन पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत विभिन्न श्रेणियों में चालान काटे जाते हैं। लेकिन अब पटना के एक चर्चित ट्रैफिक प्वाइंट को लेकर ऐसे आरोप सामने आए हैं, जिन्होंने ट्रैफिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

तारामंडल के सामने स्थित एक ट्रैफिक पोस्ट को लेकर कुछ वाहन चालकों ने आरोप लगाया है कि यहां नियम उल्लंघन के मामलों में आधिकारिक चालान की बजाय कथित तौर पर मौके पर ही पैसों के लेन-देन का दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि यू-टर्न और रॉन्ग साइड जैसे मामलों में पहले भारी जुर्माने का डर दिखाया जाता है और फिर कथित तौर पर कम रकम लेकर मामला निपटाने की पेशकश की जाती है।

कुछ वाहन चालकों का दावा है कि उन्हें पहले दो हजार रुपये या उससे अधिक के चालान की बात बताई जाती है। इसके बाद यदि चालक आधिकारिक चालान कटवाने में हिचकिचाता है या बहस करता है तो कथित रूप से 1000, 700 या 500 रुपये देकर मामला खत्म करने का सुझाव दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या अदालत द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों का कहना है कि यदि संबंधित ट्रैफिक पोस्ट और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जाए तो वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। कैमरों की फुटेज से यह पता लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों में कितने वाहनों को रोका गया, कितनों का आधिकारिक चालान किया गया और कितने मामलों में केवल चेतावनी देकर छोड़ा गया।

मामले को लेकर यह भी मांग उठ रही है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप बेबुनियाद साबित होते हैं तो इससे संबंधित कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और आधिकारिक रिकॉर्ड का मिलान ही सच्चाई सामने ला सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इन आरोपों की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है या नहीं।

रिपोर्ट-  रंजीत कुमार