पटना NEET छात्रा मौत मामला: CBI की जांच पर कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल, पूछा- 'जब जांच ही नहीं करनी थी तो मोबाइल सीज क्यों किए?'

पटना में हुए बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले में गुरुवार को कोर्ट की कार्यवाही काफी नाटकीय और तीखी रही। इस मामले में मुख्य आरोपी और हॉस्टल मालिक की जमानत पर कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

पटना NEET छात्रा मौत मामला: CBI की जांच पर कोर्ट ने उठाए गंभ

Patna - पटना की विशेष अदालत में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। जेल से कोर्ट में पेश किए गए मनीष रंजन की जमानत का पीड़ित पक्ष के वकील ने कड़ा विरोध किया। बहस इतनी लंबी और संवेदनशील थी कि करीब चार घंटे तक चली इस सुनवाई के दौरान दो घंटे तक जज के चेंबर में बंद कमरे (In-camera) कार्यवाही हुई। सीबीआई की महिला वकील की आपत्ति के बाद मामला संवेदनशील बताते हुए ओपन कोर्ट के बजाय चेंबर में दलीलें सुनी गईं।  

CBI की ढुलमुल जांच पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत का रुख सीबीआई के प्रति काफी सख्त रहा। कोर्ट ने जांच अधिकारी से पूछा कि आखिर अब तक पीड़िता और आरोपी के मोबाइल फोन की जांच क्यों नहीं की गई? सीबीआई के यह कहने पर कि 'कुल 8 फोन सीज हैं लेकिन जांच अभी नहीं हुई है', कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "जब जांच ही नहीं करनी थी, तो फोन सीज क्यों किए गए?" कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब छात्रा की मौत हो चुकी है, तो अभी तक इस मामले को 'हत्या' (Murder) की धारा में क्यों नहीं बदला गया और मौत की असली वजह का पता क्यों नहीं लगाया गया? 

वार्डन और सफाईकर्मी को लेकर फंसी जांच एजेंसी

जांच की कड़ियों को लेकर भी सीबीआई कोर्ट के सवालों के घेरे में रही। जब कोर्ट ने पूछा कि घटना के बाद पीड़िता के कमरे में कौन गया था, तो एजेंसी ने वार्डन और सफाईकर्मी का नाम लिया, लेकिन अधिकारी वार्डन का नाम तक नहीं बता पाए। वहीं, सफाईकर्मी के अनपढ़ होने के कारण बयान दर्ज न करने की दलील पर कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि अनपढ़ होने से बयान लेने में क्या समस्या है? कोर्ट ने हॉस्टल के अन्य लोगों से पूछताछ न करने और मनीष रंजन का बयान रिकॉर्ड न करने पर भी स्पष्टीकरण मांगा। 

कोर्ट के बाहर मां का करुण क्रंदन, लगाए गंभीर आरोप

अदालत की कार्यवाही के बाद बाहर का मंजर बेहद भावुक रहा। पीड़िता की मां मीडिया के सामने फूट-फूटकर रो पड़ीं और आरोप लगाया कि पुलिस और जांच एजेंसियां मामले में 'लीपापोती' कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि हॉस्टल में प्रभावशाली लोगों और नेताओं के बेटों का आना-जाना था, जिन्हें बचाने की कोशिश हो रही है। सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के नारे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या गरीबों की बेटियों को इंसाफ नहीं मिलेगा? बोलते-बोलते पीड़िता की मां कोर्ट परिसर में ही बेहोश हो गईं।