कैथी लिपि के विशेषज्ञों का पांच दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न: केवाला और खतियान की गुत्थी सुलझाने के लिए पटना में तैयार हुई नई टीम
पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान में कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शनिवार को विधिवत समापन हो गया. इस प्रशिक्षण के माध्यम से विशेषज्ञों को पुरानी पांडुलिपियों और भूमि दस्तावेजों को समझने
Patna -राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में कैथी लिपि विशेषज्ञों के लिए आयोजित पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विशेषज्ञों को कैथी लिपि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से लेकर उसके आधुनिक व्यावहारिक उपयोग तक की विस्तृत जानकारी प्रदान करना था. समापन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को भूमि सुधार और राजस्व विभाग के पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और समझने में सक्षम बनाया गया.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कैथी लिपि की विभिन्न क्षेत्रीय शैलियों जैसे मिथिला, भोजपुरी, मगध और तिरहुत पर विशेष रूप से केंद्रित व्यावहारिक अभ्यास कराया गया. विशेष कार्य पदाधिकारी अनुपम प्रकाश ने इस कार्यक्रम के व्यापक उद्देश्यों को साझा किया, जबकि बीएचयू के शोध छात्र सह प्रशिक्षक प्रीतम कुमार ने कैथी लिपि की ऐतिहासिकता और इसके सरल स्वरूप पर चर्चा की. विशेषज्ञों को पांडुलिपियों की विशेषताओं को समझने के साथ-साथ उनके सटीक अनुवाद का भी प्रशिक्षण दिया गया.
प्रशिक्षण सत्र में भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों जैसे केवाला और खतियान में प्रयुक्त जटिल भाषा को समझने पर विशेष बल दिया गया. सारण के प्रशिक्षक वकार अहमद ने इन दस्तावेजों में अक्सर मिलने वाली उर्दू और फारसी शब्दावलियों के बारे में विस्तार से बताया. प्रतिभागियों को मिथिला क्षेत्र से संबंधित ऐतिहासिक अभिलेखों का गहन अभ्यास कराया गया ताकि वे जटिल कानूनी दस्तावेजों को आसानी से पढ़ सकें.
भोजपुरी और मगध क्षेत्र की कैथी लिपियों पर आधारित सत्रों में अक्षर ज्ञान और पांडुलिपियों के विश्लेषण पर ध्यान दिया गया. प्रीतम कुमार ने संपूर्ण उत्तर भारत में उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों की जानकारी साझा की, जबकि वकार अहमद ने भोजपुरी क्षेत्रों से प्राप्त दस्तावेजों का व्यावहारिक सत्र आयोजित किया. चौथे दिन के सत्र में मगध शैली के अक्षरों की बनावट और भूमि रिकॉर्ड्स की जांच पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया.
इस पांच दिवसीय आवासीय कार्यक्रम के माध्यम से राजस्व विभाग के पास मौजूद दशकों पुराने कैथी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण और अनुवाद की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है. समापन के बाद अब ये विशेषज्ञ बिहार के विभिन्न अंचलों में उपलब्ध भूमि संबंधी पुराने रिकॉर्ड्स को पढ़ने और सुलझाने में विभागीय मदद करेंगे. यह पहल बिहार के राजस्व अभिलेखों को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.