Patna Hospitals:पटना के तीन बड़े अस्पतालों में इलाज बना इम्तिहान, पर्ची से जांच तक लंबी कतारों में बेहाल मरीज
Patna Hospitals: राजधानी के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एम्स में इलाज कराना मरीजों के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं रह गया है।...
Patna Hospitals: राजधानी के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और एम्स में इलाज कराना मरीजों के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं रह गया है। भारी तादाद में मरीजों के पहुंचने से ओपीडी से लेकर रजिस्ट्रेशन, जांच और दवा काउंटर तक हर जगह लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। हालात यह हैं कि सिर्फ पर्ची कटाने में ही मरीजों को कम से कम एक घंटे का इंतजार करना पड़ता है, जबकि डॉक्टर तक पहुंचने और परामर्श लेने में तीन से चार घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, आईजीआईएमएस की ओपीडी में सालाना 15 लाख से अधिक मरीज पहुंचते हैं। वहीं पीएमसीएच में करीब 12.45 लाख और एम्स में 10.75 लाख से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का दबाव इन संस्थानों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर साफ नजर आता है। ओपीडी के बाद जांच और दवा लेने की प्रक्रिया मरीजों की मुश्किल और बढ़ा देती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रभावी रेफरल व्यवस्था नहीं होने के कारण सामान्य मौसमी बीमारी से लेकर गंभीर रोगों तक के मरीज सीधे इन बड़े अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों, जांच सुविधाओं और अन्य संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बन रहा है।
पीएमसीएच की अगस्त की रिपोर्ट भी अस्पताल पर मरीजों के भारी बोझ की तस्वीर सामने रखती है। अगस्त में 52,059 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया, जबकि 12,282 मरीजों को भर्ती किया गया। इमरजेंसी में भी 4,015 मरीजों का उपचार हुआ। ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ त्वचा एवं कुष्ठ रोग विभाग में रही, जहां 10,584 मरीज पहुंचे। मेडिसिन विभाग में 9,634, ईएनटी में 5,407, ऑर्थोपेडिक्स में 4,122 और नेत्र रोग विभाग में 3,230 मरीजों ने इलाज कराया।भर्ती मरीजों में मेडिसिन विभाग सबसे आगे रहा, जहां अगस्त में 5,488 मरीज भर्ती हुए। ऑर्थोपेडिक्स और शिशु रोग विभाग में 2,020-2,020, सर्जरी में 2,020 और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 943 मरीज भर्ती हुए।
एक महीने के दौरान पीएमसीएच में 1,197 मेजर और 2,423 माइनर ऑपरेशन किए गए। पैथोलॉजी जांच का आंकड़ा भी बेहद बड़ा रहा। कुल 2,54,053 पैथोलॉजी जांच, 9,287 एक्स-रे, 5,648 अल्ट्रासाउंड, 893 एमआरआई और 878 सीटी स्कैन किए गए। इसके अलावा 396 डायलिसिस भी हुईं।
ये आंकड़े बताते हैं कि बड़े सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कितना बढ़ चुका है। अगर प्राथमिक और जिला स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं तथा रेफरल व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया, तो राजधानी के इन अस्पतालों में इलाज के लिए मरीजों की कतार और इंतजार का सिलसिला और लंबा हो सकता है।