Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई कड़ी फटकार, ठेकेदार को 5 लाख मुआवजा देने का दिया आदेश

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया में बरती गई मनमानी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए ठेकेदार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के एकलपीठ के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है।

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई कड़ी फटकार,
बिहार सरकार को फटकार - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया में मनमानी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए ठेकेदार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ मामूली तकनीकी बहाने लगा कर  एल-1 ठेकेदार को बाहर करना पूरी तरह मनमाना और गैरकानूनी है। साथ ही एकलपीठ के फैसले पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।वहीं  पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश को सही ठहराया।कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।

जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा और जस्टिस विकास कुमार की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की।ये मामला ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा टेंडर जारी करने से सम्बन्धित था। 30 जनवरी, 2017 को टेंडर कमेटी ने आवेदक सहित 5 बोलीदाताओं को तकनीकी रूप से योग्य पाया। 3 फरवरी, 2017 को वित्तीय बिड खुलने पर आवेदक को एल-1 घोषित किया गया।

लेकिन विधायक के  शिकायत पर जांच हुई। टेंडर कमेटी ने एल-1 और एल-2 को स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट (एसबीडी) की धारा 4.5 बी (बी) का पालन नहीं करने का आरोप लगा दोनों को अयोग्य घोषित कर टेंडर रद्द कर दिया और नया टेंडर जारी कर दिया।दूसरे टेंडर में मेसर्स लक्ष्मण कुमार को एल-1 घोषित कर काम दे दिया गया।जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई। एकलपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए कहा कि ठेकेदार को बाहर करने का आधार टिकने लायक नहीं है। तब तक काम 80% पूरा हो चुका था।एकलपीठ ने काम वापस दिलाने के बजाय ठेकेदार को 5 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया।राज्य सरकार ने एकलपीठ के आदेश को अपील दायर कर चुनौती दी।

राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि एल-1 घोषित होने से कोई कंकलुडेड कॉन्ट्रैक्ट  नहीं बनता, ठेकेदार ने नया टेंडर में हिस्सा भी नहीं लिया, और नुकसान का कोई दावा नहीं किया।एकलपीठ के 5 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश को गलत बताया।कोर्ट ने सरकार के दलील को खारिज करते हुये कहा कि जब स्टांप पेपर शपथकर्ता के नाम से  होने का कोई शर्त नहीं रखी गई थी ,तो फिर उस आधार पर किसी को अयोग्य ठहराना मनमानी है।