एनएच निर्माण में 'खास कम्युनिटी' का खेल: वक्फ बोर्ड अध्यक्ष की खुली पोल, पटना हाई कोर्ट ने खारिज किया जमीन पर रोक का आदेश
पटना हाई कोर्ट ने आमस-दरभंगा नेशनल हाईवे के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए बिहार स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी की पीठ ने ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष के आचरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जानकारी चीफ जस्टिस को देने
Patna - पटना हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए आमस-दरभंगा नेशनल हाईवे (NH) के निर्माण कार्य पर लगी रोक को हटा दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी की एकलपीठ ने बिहार स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल के 15 मई, 2025 के उस विवादित आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया, जिसने राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण को अधर में लटका दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक विकास के कार्यों में इस तरह की बाधाएं कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं।
अध्यक्ष की निष्पक्षता पर कोर्ट का 'हंटर'
अदालत ने अपने 18 पन्नों के विस्तृत आदेश में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि अध्यक्ष, जो स्वयं बिहार ज्यूडिशियल सर्विस के सदस्य हैं, वह कानून को समझने में पूरी तरह विफल रहे हैं। कोर्ट ने यहाँ तक कह दिया कि अध्यक्ष सबसे ज्यादा एक 'खास कम्युनिटी' के हितों का ख्याल रखते हैं, जो एक न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए कतई उचित नहीं है।
चीफ जस्टिस तक पहुँचेगी अध्यक्ष की 'कार्यशैली'
हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश दिया है कि वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के इस आचरण और उनकी कार्यशैली की जानकारी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के संज्ञान में लाई जाए। कोर्ट का मानना है कि ज्यूडिशियल सर्विस से जुड़े व्यक्ति का ऐसा झुकाव न्याय व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है। इस टिप्पणी ने बिहार के न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
क्या था समस्तीपुर का वह विवादित मामला?
दरअसल, समस्तीपुर जिले के शाहपुर बघनुई और मोहिउद्दीनपुर राजवा मौजा में स्थित कब्रिस्तान और मस्जिद से संबंधित कुछ प्लॉटों (2886, 3092, 2963, 2502, 2504) के भूमि अधिग्रहण को वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने भावनाओं और धार्मिक आधार का हवाला देते हुए नेशनल हाईवे के निर्माण पर रोक लगा दी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने कानूनन गलत करार दिया है।
NHAI की बड़ी जीत, निर्माण को मिली हरी झंडी
नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से दायर अर्जी को मंजूर करते हुए कोर्ट ने विकास कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस फैसले के बाद अब आमस-दरभंगा एनएच का निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के शुरू हो सकेगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों के लिए नजीर बनेगा जहाँ धार्मिक संपत्तियों का हवाला देकर बुनियादी ढांचे के विकास को रोकने की कोशिश की जाती है।