3.80 लाख के जुर्माने को घटाकर किया 10 हजार, शराबबंदी कानून पर पटना हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई पर उठाए सवाल, दे दिया बड़ा आदेश

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला उन वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत है जिनके वाहनों से मामूली मात्रा में शराब बरामद होने पर भारी जुर्माना लगा दिया जाता है। इस दौरान कोर्ट ने कानून में किए लाखों के जुर्माने को रद्द कर दिया।

3.80 लाख के जुर्माने को घटाकर किया 10 हजार, शराबबंदी कानून प

Patna - पटना हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी वाहन से बहुत कम मात्रा में शराब बरामद होती है, तो उसे छोड़ने के लिए वाहन की बीमा राशि (Insurance Value) के बराबर भारी जुर्माना लगाना पूरी तरह अनुचित और गैर-कानूनी है। जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने गोपालगंज के सदर एसडीएम द्वारा लगाए गए 3.80 लाख रुपये के भारी-भरकम जुर्माने को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस राशि को तर्कसंगत बनाते हुए महज 10 हजार रुपये कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 15 फरवरी, 2025 का है, जब गोपालपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक टाटा नेक्सॉन कार की तलाशी ली थी। इस तलाशी के दौरान कार से मात्र 375 मिलीलीटर अवैध शराब और 500 मिलीलीटर बीयर बरामद हुई थी। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने शराबबंदी कानून (उत्पाद अधिनियम) के तहत वाहन को जब्त कर लिया था। बाद में प्रशासन ने वाहन को रिलीज करने के बदले मालिक से 3.80 लाख रुपये की मांग की थी, जिसे याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

अदालत में याचिकाकर्ता की दलीलें

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी याचिकाकर्ता शम्भू नाथ राय की ओर से अधिवक्ता जावेद असलम ने कोर्ट में प्रभावी दलीलें रखीं। उन्होंने तर्क दिया कि बरामद शराब की मात्रा नगण्य थी और जिस समय यह बरामदगी हुई, वाहन मालिक मौके पर मौजूद भी नहीं था। अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बीमा राशि के बराबर जुर्माना वसूलना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ और अत्यधिक दमनकारी है।

न्याय के साथ संतुलन का आदेश

मामले की गंभीरता और तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जुर्माना निर्धारित करते समय बरामद शराब की मात्रा और घटना की परिस्थितियों पर समुचित विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर 10 हजार रुपये का जुर्माना जमा करे और आवश्यक कागजात प्रस्तुत करे। इसके बाद, प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर वाहन छोड़ने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला राज्य में उत्पाद विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी पर एक महत्वपूर्ण अंकुश माना जा रहा है।