पटना हाईकोर्ट सख्त: बिहार के आम किसानों को नहीं मिल रही सही कीमत, निर्यात के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार से माँगा जवाब

बिहार में आम किसानों की समस्याएं और समाधान, पटना हाईकोर्ट का राज्य सरकार को निर्देश आम उत्पादन, बिहार में आम के निर्यात के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव, आम उत्पादकों की आय बढ़ाने के उपाय।

पटना हाईकोर्ट सख्त: बिहार के आम किसानों को नहीं मिल रही सही

Patna - पटना हाईकोर्ट ने बिहार के आम उत्पादकों को उनकी फसल की उचित कीमत नहीं मिलने और विदेशों में निर्यात के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के अभाव से जुड़ी जनहित याचिका पर गंभीर रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकार के अब तक के जवाबों पर असंतोष जताते हुए अगली सुनवाई में विस्तृत हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने का सख्त निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में मुकर्रर की गई है।

सरकार के पुराने दावों से कोर्ट असंतुष्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आम उत्पादकों के हित में की जा रही कार्रवाइयों का ब्यौरा पेश किया गया था, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई। पूर्व की सुनवाइयों में सरकार ने बताया था कि किसानों को बेहतर और वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रशिक्षण और अच्छी किस्मों के तैयार करने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। जवाब में यह भी दावा किया गया था कि आम की पैकेजिंग, विदेशों में निर्यात और किसानों को सही मूल्य दिलाने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हालांकि, कोर्ट ने इन दावों की जमीनी हकीकत परखने के लिए ठोस सबूत मांगे हैं।

बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण पर मांगे गए कड़े सवाल

अदालत ने राज्य सरकार से पिछली सुनवाई में पूछा था कि इस वर्ष आम उत्पादकों के प्रशिक्षण के लिए वास्तव में क्या व्यवस्था की गई है। साथ ही, निर्यात के लिए आधारभूत संरचना (जैसे- कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, और ट्रांसपोर्ट लिंकेज) के विकास के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट जानना चाहता है कि सरकारी फाइलें और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है, क्योंकि किसानों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

याचिकाकर्ता ने खोला सरकारी उदासीनता का कच्चा चिट्ठा

याचिकाकर्ता अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने फरवरी 2023 में ही इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार से जानकारी मांगी थी, लेकिन आज तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में उत्तम श्रेणी के आम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में, विशेषकर बिहारी आमों की, भारी मांग है। इसके बावजूद, राज्य सरकार की उपेक्षा और उदासीनता के कारण किसानों को उनकी लागत तक मिलना मुश्किल हो रहा है।

निर्यात और विदेशी मुद्रा अर्जन का बड़ा अवसर खो रहा बिहार

अधिवक्ता चंद्र ने दलील दी कि राज्य में निर्यात के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का भारी अभाव है। यदि सरकार आम को देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों में भेजने की सुचारू व्यवस्था करे, तो न केवल किसानों को उनकी फसल का कई गुना बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि बिहार विदेशी मुद्रा भी अर्जित कर सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त सहायता से ही आम उत्पादकों की आय में वास्तविक वृद्धि संभव है, जिससे न केवल किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले आम के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस संवेदनशील मामले पर अब अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में होगी, जहाँ सरकार को कोर्ट के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा।