Patna Flutist: मुस्लिम घराने में जन्मे, कृष्ण भक्ति में रमे, मुजतबा हुसैन की बांसुरी में बसते हैं कान्हा

जहब की सरहदों से परे संगीत जब सुर छेड़ता है, तो उसकी गूंज दिलों को जोड़ देती है। ...

Muslim Flutist Mujtaba Hussain

Patna Flutist: मजहब की सरहदों से परे संगीत जब सुर छेड़ता है, तो उसकी गूंज दिलों को जोड़ देती है। राजधानी पटना के सुल्तानगंज (नौघरवा) से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाने वाले प्रख्यात बांसुरी वादक डॉ. मुजतबा हुसैन इसकी जीवंत मिसाल हैं। मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ. हुसैन भारतीय सनातन परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक हैं। उनकी बांसुरी से जब कृष्ण भजनों की धुन निकलती है तो श्रोता भक्ति रस में सराबोर हो जाते हैं।

खानदानी संगीत परंपरा में पले-बढ़े डॉ. मुजतबा हुसैन ने महज आठ वर्ष की उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा। दादा, पिता और चाचाओं से शहनाई और बांसुरी के सुरों की विरासत मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी कला के बूते बॉलीवुड से लेकर यूरोप, अफ्रीका और खाड़ी देशों तक भारतीय शास्त्रीय संगीत की पताका फहराई।

उनकी बांसुरी पर राग देश में पिरोए भजन “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव” और “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” सुनना श्रोताओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है। खास बात यह है कि कृष्ण भक्ति की यह परंपरा अब अगली पीढ़ी तक भी पहुंच रही है। उनकी बेटी चाहत हुसैन भी कृष्ण भजनों के साथ वेद ऋचाओं का सस्वर पाठ कर सांस्कृतिक समरसता की इस खूबसूरत विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।

डॉ. मुजतबा हुसैन आकाशवाणी के ए-ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा लोक नायक कला श्री और पंजाब के राज्यपाल द्वारा रसखान सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के परफॉर्मिंग फाइन आर्ट विभाग से जुड़े हैं। उन्होंने पंजाब के वायु वाद्यों पर पीएचडी की है।

एआर रहमान, रवींद्र जैन, जगजीत सिंह और उस्ताद जाकिर हुसैन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर चुके डॉ. हुसैन अब धुन एकेडमी ऑफ म्यूजिक एंड कल्चर के जरिए नई पीढ़ी को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और संगीत की समृद्ध विरासत से जोड़ रहे हैं।

मुजतबा हुसैन की कहानी सिर्फ एक कलाकार की कामयाबी नहीं, बल्कि उस गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर है, जहां सुर मजहब नहीं पूछते और भक्ति किसी एक पहचान की मोहताज नहीं होती।