Patna Firing Case: खान सर के सेल्फ डिफेंस की कहानी पर बड़ा सवाल, 20 मिनट बाद चली गोली, जांच में खुला नया राज, खुलासे से पटना कोचिंग कांड में सनसनी

Patna Firing Case:पुलिस की नई केस डायरी में सामने आई जानकारियों ने पूरे घटनाक्रम को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।...

Khan Sir Ordered Firing to Spread Fear Probe Diary Claims
खान सर के सेल्फ डिफेंस की कहानी पर बड़ा सवाल- फोटो : social Media

Patna Firing Case: पटना के चर्चित कोचिंग विवाद में अब कहानी सिर्फ मारपीट और तोड़फोड़ तक सीमित नहीं रह गई है। पुलिस की नई केस डायरी में सामने आई जानकारियों ने पूरे घटनाक्रम को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। जिस फायरिंग को अब तक आत्मरक्षा यानी सेल्फ डिफेंस का कदम बताया जा रहा था, जांच की सुई अब उस दावे पर ही सवाल खड़े कर रही है।

2 जून की रात मुसल्लहपुर हाट इलाके में हुए इस हाई-प्रोफाइल बवाल के बाद से लगातार बयानबाजी चल रही थी। खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर का पक्ष यह कहता रहा कि उनके गार्डों ने हंगामा, तोड़फोड़ और हमले के बीच खुद की हिफाजत के लिए ट्रिगर दबाया था। लेकिन पुलिस जांच में जो तस्वीर उभर रही है, वह कुछ और कहानी बयां कर रही है।सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह टाइमलाइन सामने आई है कि गार्ड चुनचुन के साथ मारपीट और बैनर में तोड़फोड़ की घटना रात करीब 10:10 बजे हुई थी। वहीं, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर फायरिंग करीब 10:30 बजे के आसपास हुई। यानी दोनों घटनाओं के बीच लगभग 20 मिनट का फासला है।

यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को उलझा दिया है। अगर हमला तत्काल था और जान का खतरा सामने था, तो फिर गोली उसी वक्त क्यों नहीं चली? और यदि गोली 20 मिनट बाद चली, तो क्या वह वास्तव में आत्मरक्षा थी या फिर इलाके में दहशत कायम करने की कोशिश? पुलिस फिलहाल इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।

5 जून को पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में भी यह उल्लेख किया गया था कि जांच के दौरान एक वीडियो मिला है, जिसमें दो लोग घटना के बाद हवाई फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद जांच टीम ने आसपास के लोगों से पहचान कराई और फिर बॉडीगार्ड प्रदीप कुमार तथा तालेश्वर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान एक और सनसनीखेज दावा सामने आया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में प्रदीप कुमार ने कथित तौर पर कहा है कि फायरिंग खान सर के निर्देश पर की गई थी। प्रदीप ने यह भी दावा किया कि नौकरी के शुरुआती दिनों में ही उन्हें और उनके साथी को यह समझाया गया था कि इलाके में कोचिंग संस्थानों के बीच तनाव बना रहता है और विवाद की स्थिति में पीछे नहीं हटना है।केस डायरी में दर्ज कथित बयान के मुताबिक, घटना वाली रात जब भीड़ उग्र हुई और गेट पर मौजूद गार्ड की पिटाई हुई, तब कथित तौर पर फायरिंग का निर्देश दिया गया। इसके बाद दोनों गार्डों ने दो-दो राउंड गोलियां चलाईं।

हालांकि, पुलिस के सामने सबसे बड़ा कानूनी सवाल आत्मरक्षा के दावे का है। कानून की नजर में सिर्फ खतरे का अंदेशा होना पर्याप्त नहीं माना जाता। यह साबित करना पड़ता है कि खतरा तत्काल और वास्तविक था तथा उससे बचने का कोई दूसरा रास्ता मौजूद नहीं था। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक हमलावरों के पास हथियार होने की पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह स्थिति बरकरार रहती है, तो सेल्फ डिफेंस की दलील कमजोर पड़ सकती है।उधर, पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या फायरिंग का उद्देश्य हमलावरों को रोकना था या फिर वहां मौजूद लोगों में खौफ पैदा करना। जब्त राइफलों को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया है और वीडियो फुटेज का मिलान तकनीकी साक्ष्यों से किया जा रहा है।

पूरे मामले में अब सबकी नजर 20 जून को अपडेट होने वाली केस डायरी पर टिकी है। माना जा रहा है कि उसमें घटना और फायरिंग के बीच के समयांतराल, वीडियो साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का जिक्र हो सकता है।फिलहाल इतना तय है कि कोचिंग नगरी के इस चर्चित विवाद में गोलियों की गूंज अब सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है। यह गूंज अदालत, पुलिस जांच और जनमत तीनों जगह सुनाई दे रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि यह मामला आत्मरक्षा का था या फिर दहशत फैलाने के लिए चली गोलियों का।