1977 में पहला चुनाव हार गए थे नीतीश कुमार, फिर ऐसे बने विधायक, सांसद, एमएलसी और अब राज्यसभा सदस्य ... जानिए रोचक सियासी सफर

वर्ष 2000 में पहली बार नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे 7 दिनों के लिए सीएम पद पर रहे। नवंबर 2005 में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

Nitish Kumar
Nitish Kumar - फोटो : news4nation

Nitish Kumar : नीतीश कुमार भारतीय राजनीति के उन नेताओं में हैं जिन्होंने वैचारिक बदलावों, गठबंधनों और प्रशासनिक प्रयोगों के बीच लंबी पारी खेली है। उनका सियासी सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर आज राज्यसभा तक पहुंचने की तैयारी में है। नीतीश कुमार ने पहली बार 1977 में हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 1985 में वे पहली बार बिहार विधानसभा के लिए हरनौत से निर्वाचित हुए। यह उनकी सक्रिय विधायी राजनीति की शुरुआत थी।


लोकसभा में उनका प्रवेश 1989 में हुआ, जब वे बाढ़ संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद वे 1991, 1996, 1998 और 1999 में भी बाढ़ से लोकसभा पहुंचे। केंद्र की राजनीति में उन्होंने कृषि, रेल और सतह परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। विशेष रूप से रेल मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को काफी चर्चा मिली। वहीं 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार नालंदा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे।


वर्ष 2000 में पहली बार नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे 7 दिनों के लिए सीएम पद पर रहे। वहीं बिहार की राजनीति में निर्णायक मोड़ 2005 में आया। नवंबर 2005 में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद वे 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री रहते हुए विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी निर्वाचित हुए। वहीं 2005 से 2025 के बीच कई मौको पर नीतीश कुमार उलट-पुलट की राजनीति करते रहे, इसमें एनडीए के साथ ही लालू यादव की पार्टी राजद के साथ मिलकर भी नीतीश कुमार ने बिहार के सत्ता चलाई।


अपने राजनीतिक जीवन में वे लोकसभा और विधानसभा दोनों सदनों के सदस्य रहे हैं, साथ ही विधान परिषद की सदस्यता भी संभाली है। इस तरह वे तीनों विधायी सदनों का अनुभव रखने वाले विरले नेताओं में गिने जाते हैं।  अब जब नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन करने जा रहे हैं, तो इसे उनके लंबे राजनीतिक सफर का एक नया अध्याय माना जा रहा है। छात्र राजनीति से लेकर मुख्यमंत्री पद और अब उच्च सदन की दहलीज तक पहुंचने की यह यात्रा बिहार की राजनीति के कई उतार-चढ़ावों की साक्षी रही है।