अब आसमान से देखिए पटना! सिर्फ ₹2100 में हेलीकॉप्टर की सवारी, राजगीर-वाल्मीकिनगर के लिए भी उड़ान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेली-टूरिज्म मॉडल पर काम कर रही है, इस पहल का उद्देश्य राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच को आसान बनाना है।
Helicopter Tourism in Bihar : बिहार में पर्यटन को नई उड़ान देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि आगामी 15 जुलाई से पटना में हेलीकॉप्टर के जरिए हवाई सैर की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके तहत पटनावासी और पर्यटक मात्र 2100 रुपये में राजधानी का हवाई नजारा देख सकेंगे। राज्य सरकार का दावा है कि यह पहल बिहार को देश के उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में लाएगी, जहां आम लोगों को भी रियायती दर पर हेलीकॉप्टर पर्यटन का अनुभव मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेली-टूरिज्म मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत राजगीर, मां मुंडेश्वरी मंदिर, तुतला भवानी मंदिर, क्षेत्र के प्रमुख जलप्रपातों तथा वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इन स्थलों की हवाई यात्रा के लिए पर्यटकों को लगभग 6000 रुपये का शुल्क देना होगा, जबकि शेष खर्च का वहन राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में करेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य राज्य के धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच को आसान बनाना है। सड़क मार्ग से कई घंटे की यात्रा को हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। विशेष रूप से वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व और कैमूर क्षेत्र जैसे दूरस्थ पर्यटन स्थलों को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बिहार सरकार पहले से ही हेली-टूरिज्म परियोजना पर काम कर रही है। योजना के तहत पटना को राजगीर, नालंदा, बोधगया, वैशाली, पावापुरी, पटना साहिब और वाल्मीकिनगर जैसे प्रमुख स्थलों से हवाई मार्ग के जरिए जोड़ने की तैयारी की जा रही है। पर्यटन विभाग का मानना है कि इससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि हेलीकॉप्टर पर्यटन सेवा शुरू होने से बिहार की नई पर्यटन पहचान बनेगी। राजगीर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व, कैमूर क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य तथा वाल्मीकिनगर के वन्यजीव पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। साथ ही स्थानीय रोजगार और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।