Bihar News : राजद विधायक के बयान पर 'हम' का तीखा हमला, मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण बोले– कुमार सर्वजीत ने खुद स्वीकारा, लठैत पार्टी और जंगलराज ही थी राजद की पहचान’

Bihar News : हम के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने कहा कि राजद विधायक कुमार सर्वजीत के वक्तव्य ने पार्टी की पूरी राजनीतिक विरासत, इतिहास और उनकी कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है.......पढ़िए आगे

Bihar News : राजद विधायक के बयान पर 'हम' का तीखा हमला, मुख्य
राजद की वास्तविक स्थिति - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्याम सुन्दर शरण ने राष्ट्रीय जनता दल के बोधगया विधायक एवं पूर्व मंत्री कुमार सर्वजीत द्वारा एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनके वक्तव्य ने राजद की पूरी राजनीतिक विरासत और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। शरण ने कहा कि कुमार सर्वजीत ने स्वयं स्वीकार किया है कि राजद की पहचान एक "लठैत पार्टी" के रूप में रही है तथा लालू प्रसाद यादव के शासन मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धि चरवाहा विद्यालय था। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि संजय यादव ने इस "लठैत पार्टी" को हाईटेक बनाने का काम किया। यह टिप्पणी किसी राजनीतिक विरोधी की नहीं, बल्कि राजद के अपने वरिष्ठ नेता की है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

उन्होंने कहा कि बिहार की जनता वर्षों से जिस सच्चाई को महसूस करती रही है, आज वही राजद के भीतर से सार्वजनिक रूप से स्वीकार की जा रही है। लाठी, चारा, चरवाहा और जंगलराज—ये केवल राजनीतिक नारे नहीं, बल्कि राजद शासनकाल की पहचान बन चुके थे। उस दौर में बिहार अपराध, अपहरण, रंगदारी और प्रशासनिक अराजकता के कारण पूरे देश में बदनाम हुआ। विकास, उद्योग, निवेश और रोजगार की चर्चा के बजाय सत्ता संरक्षित अपराधियों और कानून-व्यवस्था की विफलता की खबरें सुर्खियों में रहती थीं। श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि बिहार उच्च न्यायालय को भी विभिन्न मामलों में राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था पर कठोर टिप्पणियाँ करनी पड़ी थीं। यह इतिहास आज भी बिहार की जनता भूली नहीं है।

उन्होंने कहा कि सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि कुमार सर्वजीत के बयान से विपक्ष नहीं, बल्कि राजद परिवार और उसके नेता सबसे अधिक असहज दिखाई दे रहे हैं। रोहिणी आचार्या की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व, प्रभाव और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष गहराता जा रहा है। परिवार में विरासत की लड़ाई अब संगठन के भीतर भी सत्ता और नियंत्रण की प्रतिस्पर्धा के रूप में सामने आ रही है।

शरण ने कहा कि आज राजद को भाजपा, जदयू अथवा एनडीए से उतना खतरा नहीं है, जितना अपने ही नेताओं की स्वीकारोक्तियों और परिवार के भीतर बढ़ते अंतर्विरोधों से है। जब पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वयं यह कह रहे हों कि यह लठैतों की पार्टी थी, जिसे बाद में हाईटेक बनाया गया, तब बिहार की जनता को राजद की मूल राजनीतिक सोच और संस्कृति को समझने में कोई कठिनाई नहीं रह जाती। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजद के भीतर का अंतर्विरोध, नेतृत्व संघर्ष और संगठनात्मक बिखराव और अधिक खुलकर सामने आएगा, क्योंकि सच्चाई को अधिक दिनों तक छिपाया नहीं जा सकता।