Bihar News : माँ के साथ चाय दुकान पर काम रही बेटी, पिता ने लगाई न्याय की गुहार, पटना हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में जांच के दिए आदेश

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने मां की चाय की दुकान पर काम कर रही बेटी की गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए दरभंगा के फैमिली कोर्ट को दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की गहन जांच करने का आदेश दिया है....

Bihar News : माँ के साथ चाय दुकान पर काम रही बेटी, पिता ने ल
पटना हाईकोर्ट का फैसला - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने एक मासूम बच्ची के सुनहरे भविष्य और उसकी सुरक्षा को लेकर ने बेहद संवेदनशील और कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट के सामने यह दिल दहला देने वाला मामला आया कि जिस उम्र में बच्ची के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उसे अपनी मां की चाय की दुकान पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, हाईकोर्ट ने दरभंगा के फैमिली कोर्ट (प्रधान न्यायाधीश) को निर्देश दिया है कि वह मात्र दो सप्ताह (14 दिन) के भीतर इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच करे। जस्टिस  राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जांच में यह सच पाया जाता है कि बच्ची से श्रम कराया जा रहा है या उसकी उपेक्षा हो रही है, तो कोर्ट बिना किसी देरी के उसके संरक्षण और सर्वोत्तम हित में कड़े कदम उठाए।

दरभंगा के रहने वाले अनुराग ने अपनी नाबालिग बेटी ओरा मिश्रा के अधिकार और सुरक्षित भविष्य के लिए हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। पिता का दर्द है कि मां (निगम रानी) द्वारा न तो कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन किया जा रहा है और न ही मामले की सुनवाई में सहयोग किया जा रहा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि एक मासूम बच्ची का जीवन दांव पर लगा है, जिसे पढ़ाई-लिखाई के माहौल से दूर चाय की दुकान पर काम करने के लिए विवश किया जा रहा है।

इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार ने भी अपनी प्रतिबद्धता जताई और आश्वस्त किया कि उस बच्ची को हरसंभव सुरक्षा, प्यार और उचित देखभाल मिलनी चाहिए, जिसकी वह हकदार है। हाईकोर्ट ने दरभंगा फैमिली कोर्ट को आदेश दिया गया है कि वह दो हफ्ते के भीतर यह पता लगाए कि क्या वाकई बच्ची से चाय की दुकान पर काम कराया जा रहा है।

 गार्जियनशिप केस की सुनवाई अब बिना किसी अनावश्यक देरी के रोज (दिन-प्रतिदिन) की जाएगी, ताकि तीन महीने के भीतर इस अनिश्चितता को खत्म कर बच्ची के हित में फैसला लिया जा सके। यदि जांच में बच्ची की उपेक्षा या असुरक्षा की बात सामने आती है, तो कोर्ट उसके सुरक्षित भविष्य के लिए तुरंत कड़े आदेश पारित करेगी। हाईकोर्ट ने एक बच्चे का कल्याण, उसकी मुस्कान और उसका सर्वोत्तम हित हमारे लिए सर्वोपरि है। अदालत यह कतई बर्दाश्त नहीं करेगी कि किसी मासूम के अधिकारों और उसके उज्ज्वल भविष्य के साथ कोई समझौता हो।