Bihar News: बिहार में 5 हजार जब्त वाहनों की होगी नीलामी, सरकार को मिलेंगे इतने करोड़ रुपये

Bihar News:बिहार में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जब्त किए गए हजारों वाहनों की अब नीलामी की जाएगी।..

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5 हजार जब्त वाहनों की होगी नीलामी- फोटो : social Media

Bihar News:बिहार में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जब्त किए गए हजारों वाहनों की अब नीलामी की जाएगी। खान एवं भूतत्व विभाग ने करीब 5 हजार वाहनों को नीलाम करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग को इस प्रक्रिया से लगभग 200 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। नीलामी में ट्रैक्टर, हाईवा, डंपर, ट्रक और लोडर समेत कई तरह के वाहन शामिल होंगे। इन वाहनों का इस्तेमाल बालू और अन्य खनिजों के अवैध खनन एवं परिवहन में किया जा रहा था।

विभाग की ओर से वाहन मालिकों को निर्धारित जुर्माना जमा कर अपनी गाड़ियां छुड़ाने का मौका दिया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मालिकों ने जुर्माना नहीं भरा। अब ऐसे वाहनों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राजसात कर नीलाम करने की तैयारी की जा रही है। इससे सरकारी खजाने को राजस्व मिलने के साथ विभिन्न जिलों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों का भी निपटारा हो सकेगा।

अवैध खनन के खिलाफ अभियान में 8,714 वाहन जब्त

खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में अवैध खनन के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न जिलों से कुल 8,714 वाहन जब्त किए गए। इनमें अवैध तरीके से बालू और अन्य खनिजों की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले वाहन भी शामिल हैं।खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि अवैध खनन में इस्तेमाल किए गए जब्त वाहनों और खनिज पदार्थों की नीलामी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।विभागीय जानकारी के मुताबिक, 70 प्रतिशत से अधिक वाहन मालिकों ने निर्धारित समय में जुर्माना जमा कर अपनी गाड़ियां नहीं छुड़ाईं। इसके बाद नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। फिलहाल जब्त वाहनों का रिकॉर्ड तैयार करने के साथ जरूरी दस्तावेज और कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

30 दिनों में जुर्माना जमा कर छुड़ाना होता है वाहन

बिहार खनिज नियमावली के तहत जब्त वाहन को छुड़ाने के लिए मालिक को 30 दिनों का समय दिया जाता है। इस अवधि में खनिज का मूल्य, रॉयल्टी और निर्धारित जुर्माना जमा करना होता है। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन देकर वाहन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।यदि तय समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो वाहन मालिक के पंजीकृत पते पर रिमाइंडर नोटिस भेजा जाता है। इसके बाद भी जुर्माना जमा नहीं होने पर वाहन को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ऐसे वाहनों की नीलामी की जा सकती है।

जुर्माना अधिक, बाजार कीमत कम होने से गाड़ियां नहीं छुड़ा रहे मालिक

अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए कई वाहन पुराने मॉडल के हैं। उनकी बाजार कीमत कम होने के बावजूद उन पर लगाया गया जुर्माना काफी अधिक हो सकता है। ऐसे में कुछ वाहन मालिक जुर्माना भरकर गाड़ी छुड़ाने के बजाय उसे छोड़ देना उचित समझते हैं।इसके अलावा, कुछ वाहन फर्जी नंबर प्लेट या जरूरी कागजात के बिना चलाए जाते हैं। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के डर से भी मालिक सामने नहीं आते। फाइनेंस पर खरीदे गए वाहनों के मामलों में मालिकों और फाइनेंसरों की ओर से भी कई बार पहल नहीं की जाती है।लंबे समय से ये वाहन विभिन्न जिलों के डंपिंग यार्ड, पुलिस थानों और जिला खनन कार्यालयों में खड़े हैं। कई गाड़ियां महीनों से खुले में पड़ी हैं। नीलामी से इनके निपटारे का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

जब्त बालू की भी होगी नीलामी, सरकारी योजनाओं में पहले इस्तेमाल

विभाग जब्त वाहनों के साथ अवैध खनन के दौरान बरामद किए गए खनिज पदार्थों का भी निपटारा करेगा। इसमें जब्त बालू प्रमुख है। पहले इसकी मात्रा और गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।प्रथम चरण में जब्त बालू को पथ निर्माण, भवन निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग की परियोजनाओं में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए निर्धारित सरकारी दरों के आधार पर बालू उपलब्ध कराया जाएगा। सरकारी निर्माण कार्यों की जरूरत पूरी होने के बाद बचा हुआ बालू खुले बाजार में नीलाम किया जाएगा।इस व्यवस्था से जब्त खनिजों का सरकारी परियोजनाओं में उपयोग संभव होगा। साथ ही, शेष बालू की बिक्री और वाहनों की नीलामी से सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध खनन पर लगाम लगाने के साथ जब्त संसाधनों का नियमानुसार निपटारा करना है।