सोशल मीडिया पर गुंडागर्दी पर बिहार सरकार का चला डंडा, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लिखने से पहले पढ़ ले नया नियम, दोषियों को 6 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा

Bihar Digital Crime Law: बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में बड़ा फैसला सामने आया है। ..

Bihar Tightens Law Jail for Social media Online Abuse
डिजिटल गुंडागर्दी पर बिहार सरकार का वार- फोटो : social Media

 Bihar Digital Crime Law: बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में बड़ा फैसला सामने आया है। डिजिटल अपराध, साइबर ठगी और प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंध लगाने वाले पेपर लीक माफिया के खिलाफ बिहार सरकार ने सख्त कानून का रास्ता अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम-2024 (CCA) में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई।नए प्रावधानों के बाद सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा, गाली-गलौज, अमर्यादित टिप्पणी और समाज में वैमनस्य फैलाने वाले आपत्तिजनक कंटेंट डालने वालों पर अब सीधे गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को अराजकता फैलाने का हथियार बनाने वालों पर अब सख्ती से नकेल कसी जाएगी।

इस कानून के दायरे में आने वाले दोषियों को 6 महीने से लेकर 1 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। प्रशासन को ऐसे मामलों में पहले से ज्यादा अधिकार मिलेंगे। अगर जिलाधिकारी को लगे कि किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर रही हैं, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी।

ऐसे व्यक्ति को बिना जमानत तीन महीने तक हिरासत में रखने, जिले या निर्धारित क्षेत्र से बाहर रहने का आदेश देने और थाने में नियमित उपस्थिति दर्ज कराने जैसी कार्रवाई संभव होगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति की डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी भी रखी जा सकेगी।

कैबिनेट के फैसले में सबसे बड़ा निशाना पेपर लीक गिरोह और परीक्षा माफिया पर साधा गया है। अब प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंधमारी करने वाले गिरोह, उनके सहयोगियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों पर भी CCA के तहत कार्रवाई होगी। सरकार का दावा है कि यह कदम लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।

वहीं, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने विशिष्ट विश्वविद्यालय विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी है। इसके जरिए आधुनिक शोध, तकनीकी नवाचार, वैज्ञानिक सोच और रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की तैयारी है।

इसके अलावा अंग्रेजी हुकूमत के दौर के 132 साल पुराने जेल कानूनों को खत्म करने का फैसला लिया गया है। सरकार ने पुराने द प्रिजन एक्ट-1894, द प्रिजनर्स एक्ट-1900 और द ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट-1950 को समाप्त कर बिहार कारा एवं सुधारात्मक सेवा विधेयक-2026 को मंजूरी दी है।

सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जेलों को सुधार केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि विपक्ष सरकार के बढ़ते प्रशासनिक अधिकारों और उनके इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। आने वाले दिनों में CCA संशोधन बिहार की राजनीति में एक बड़ा बहस का मुद्दा बनना तय माना जा रहा है।