Bihar News: शराब के विकल्प के रूप में नीरा की बढ़ती धाक, बिहार में 32 लाख लीटर से ज्यादा बिक्री, हजारों परिवारों की आय का बना मजबूत सहारा
Bihar News: मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना के तहत सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है।...
Bihar News: बिहार में ताड़ और खजूर के पेड़ों से प्राप्त होने वाला पारंपरिक पेय नीरा अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना के तहत सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में नीरा की बढ़ती लोकप्रियता ने न केवल ग्रामीण रोजगार को नई दिशा दी है, बल्कि हजारों परिवारों की आमदनी का भी मजबूत जरिया बन गई है।
जीविका द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार चालू नीरा सीजन (मई से अगस्त) में 14 जून तक पूरे बिहार में 32 लाख 66 हजार लीटर से अधिक नीरा का संग्रहण किया गया। इनमें से 32 लाख 55 हजार 481 लीटर नीरा की बिक्री भी हो चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि लोगों के बीच नीरा की मांग लगातार बढ़ रही है और इसे एक पौष्टिक एवं प्राकृतिक पेय के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
योजना के तहत राज्यभर में लगभग 40 हजार 862 ताड़ और खजूर के पेड़ों से नीरा संग्रहित किया जा रहा है। इस कार्य में 9 हजार 865 टैपर्स सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जबकि 10 हजार 743 पेड़ मालिक भी इससे आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं।
नीरा के विपणन को मजबूत बनाने के लिए राज्यभर में 1,691 अस्थायी और स्थायी बिक्री काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। वहीं 571 सक्रिय प्रोड्यूसर ग्रुप नीरा से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनमें नीरा का गुड़, पेड़ा, तिलकुट और अन्य स्वास्थ्यवर्धक मिठाइयां शामिल हैं, जिन्हें मधुमेह रोगियों के लिए भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है।
सरकार का उद्देश्य नीरा को केवल एक पेय पदार्थ तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इसे ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ना है। यही वजह है कि आज नीरा बिहार में शराब के विकल्प के रूप में एक नई पहचान बना रहा है और हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।