बिहार का दो दशकों में कायाकल्प: आर्थिक और सामाजिक संकेतकों पर देश में अव्वल

बिहार ने पिछले दो दशकों में सतत और समावेशी विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। नीति आयोग और राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने मानव विकास, गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख सामाजिक-आर्थिक मानकों पर ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की ह

बिहार का दो दशकों में कायाकल्प: आर्थिक और सामाजिक संकेतकों प

Patna : बिहार ने पिछले दो दशकों में सतत और समावेशी विकास का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। नीति आयोग और राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने मानव विकास, गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख सामाजिक-आर्थिक मानकों पर ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। इस अवधि में प्रति व्यक्ति आय में 13 गुना की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ बिहार देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की ओर तेजी से अग्रसर है।


बहुआयामी गरीबी उन्मूलन में देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, बिहार देश में सबसे तेज गति से गरीबी कम करने वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2015-16 में राज्य की 51.89% आबादी बहुआयामी गरीबी के दायरे में थी, जो 2019-21 में घटकर 33.76% रह गई। इस 18.13 प्रतिशत अंक की गिरावट के साथ बिहार का सुधार राष्ट्रीय औसत (9.89 प्रतिशत अंक) से लगभग दोगुना है, जो बुनियादी सेवाओं में निरंतर निवेश का परिणाम है।


प्रति व्यक्ति आय और विकास व्यय में अभूतपूर्व उछाल

राज्य की आर्थिक प्रगति की गति का अंदाजा प्रति व्यक्ति आय से लगाया जा सकता है, जो वर्ष 2004 के ₹5,780 से बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹76,490 हो गई है। यह 1,223 प्रतिशत की कुल वृद्धि और 13% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। इसी तरह, प्रति व्यक्ति विकास व्यय ₹1,463 से बढ़कर ₹13,279 हो गया है, जिसमें स्वास्थ्य बजट में 14.8 गुना और शिक्षा बजट में 13.2 गुना की भारी बढ़ोतरी शामिल है।


स्वास्थ्य, पोषण और रोजगार के मोर्चे पर व्यापक सुधार

स्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थागत प्रसव का ग्राफ 19.9% से उछलकर 81.1% पहुंच गया है, जबकि जन्म के समय जीवन प्रत्याशा बढ़कर 69.5 वर्ष हो गई है। बच्चों में नाटापन (स्टंटिंग) और कम वजन की समस्या में 20 प्रतिशत अंकों से अधिक की कमी आई है, जो राष्ट्रीय सुधार दर से काफी बेहतर है। इसके अतिरिक्त, पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2024 के मुताबिक बिहार की बेरोजगारी दर 3% है, जो राष्ट्रीय औसत (3.2%) से कम है।


सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में 'फ्रंट रनर' बना राज्य

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में बिहार का समग्र स्कोर 48 से बढ़कर 57 हो गया है, जिससे राज्य अब 'परफॉर्मर' श्रेणी में आ गया है। स्वच्छ जल और स्वच्छता (SDG-6) में 98 अंकों के साथ बिहार देश में तीसरे स्थान पर है। वहीं, स्वास्थ्य और कल्याण (SDG-3) में अपना स्कोर 44 से बढ़ाकर 67 करने के साथ ही राज्य 'एस्पायरेंट' श्रेणी से निकलकर 'फ्रंट रनर' श्रेणी में शामिल हो चुका है।