Bihar Coaching Business: बिहार में पढ़ाई भी बना बड़ा कारोबार, करोड़ों का कोचिंग बाजार, इतने लाख लोग ट्यूशन से चला रहे रोजी-रोटी
Bihar Coaching Business:बिहार में शिक्षा सिर्फ भविष्य बनाने का जरिया नहीं, बल्कि रोजगार और कमाई का बड़ा माध्यम भी बन चुकी है।...
Bihar Coaching Business:बिहार में शिक्षा सिर्फ भविष्य बनाने का जरिया नहीं, बल्कि रोजगार और कमाई का बड़ा माध्यम भी बन चुकी है। राज्य में छोटे स्तर की कोचिंग और होम ट्यूशन का कारोबार करीब 1,100 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। ट्यूशन और छोटे स्तर पर कोचिंग के जरिए रोजी-रोजगार कमाने के मामले में बिहार देश में तीसरे पायदान पर है।
ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 5.55 लाख से अधिक लोग बच्चों को पढ़ाने के काम से जुड़े हुए हैं। इनमें घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाने वाले होम ट्यूटर से लेकर किसी एक जगह पर बच्चों को जुटाकर छोटी कोचिंग चलाने वाले शिक्षक तक शामिल हैं। खास बात यह है कि इस असंगठित शैक्षणिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी काफी मजबूत है। पंजीकृत लोगों में करीब 49 फीसदी महिलाएं और 51 फीसदी पुरुष हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 24 अगस्त 2021 से असंगठित क्षेत्र के विभिन्न सेक्टर में काम करने वाले लोगों का पंजीकरण इस पोर्टल पर किया जा रहा है। इसी आंकड़े से बिहार में होम ट्यूशन और छोटे स्तर की कोचिंग से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या सामने आती है।
चार बच्चों से 20 हजार तक की कमाई
होम ट्यूटर की आमदनी इलाके और विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति बच्चे करीब 2,500 से 3,000 रुपये और शहरी इलाकों में करीब 4,000 से 6,000 रुपये तक मासिक फीस मिलने की बात सामने आती है।यदि औसतन 5,000 रुपये प्रति विद्यार्थी फीस मानी जाए और एक शिक्षक औसतन चार बच्चों को पढ़ाता है, तो उसकी मासिक आमदनी करीब 20 हजार रुपये बैठती है। इसी औसत के आधार पर 5.55 लाख शिक्षकों की कमाई का अनुमान लगाया जाए तो छोटे स्तर के कोचिंग और होम ट्यूशन का मासिक कारोबार 1,100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचता है।यह अनुमान बड़े और नामी संस्थानों को शामिल किए बिना है। यानी बिहार में छोटे स्तर पर बच्चों को पढ़ाकर कमाई करने वालों का अपना एक विशाल शैक्षणिक इकोसिस्टम खड़ा हो चुका है।
युवाओं के हाथ में कोचिंग की कमान
इस क्षेत्र में युवाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में कोचिंग और ट्यूशन से जुड़े 18 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 90.77 फीसदी है। 40 से 50 वर्ष की उम्र के लोग 5.30 फीसदी और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग 3.68 फीसदी हैं।यानी होम ट्यूशन और छोटी कोचिंग का कारोबार मुख्य रूप से युवा शिक्षकों के रोजगार का बड़ा आधार बन चुका है। महिलाओं की करीब आधी हिस्सेदारी इस कारोबार को और महत्वपूर्ण बनाती है।
पटना सबसे आगे, दूसरे जिलों में भी बड़ा नेटवर्क
ई-श्रम पंजीकरण के आंकड़ों में पटना 49,853 पंजीकृत लोगों के साथ सबसे आगे है। इसके बाद दरभंगा में 24,682, मधुबनी में 25,408, मुजफ्फरपुर में 29,806, समस्तीपुर में 23,494, सारण में 21,750, भागलपुर में 19,608 और गया में 23,853 लोग पढ़ाने के काम से जुड़े बताए गए हैं।हालांकि, असंगठित क्षेत्र के होम ट्यूटर और छोटे कोचिंग संस्थानों से अलग बिहार में बड़े कोचिंग संस्थानों का भी विशाल नेटवर्क मौजूद है। NEET, JEE, UPSC, BPSC, SSC, रेलवे और बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले संस्थान अलग स्तर पर बड़ा कारोबार करते हैं।इन बड़े संस्थानों की आय हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया जाता है और यहां पढ़ाने वाले लोकप्रिय शिक्षकों को भी लाखों रुपये तक का आकर्षक वेतन मिलने की बात सामने आती है। इस तरह बिहार में छोटे होम ट्यूटर से लेकर बड़े कोचिंग ब्रांड तक, शिक्षा का पूरा बाजार एक बड़े आर्थिक सेक्टर का रूप ले चुका है।