करोड़ों बच्चों के निवाले पर बड़ा फैसला: ' बिहार सरकार सभी जिलों में आधी रात को किया यह फरमान जारी!

बिहार के 1 करोड़ 30 लाख बच्चों के मिड-डे मील को लेकर सरकार ने 'डू और डाई' वाला रुख अपना लिया है। शिक्षा विभाग के नए आदेश ने साफ कर दिया है कि अगर गैस खत्म हुई तो क्या होगा और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर क्या गाज गिरेगी।

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Patna  - बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1 करोड़ 30 लाख बच्चों के लिए बड़ी खबर है। मध्याह्न भोजन निदेशालय के निदेशक विनायक मिश्र ने सभी जिलों को "करो या मरो" वाला आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिलों के कार्यक्रम पदाधिकारियों की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि बच्चों को मिलने वाला दोपहर का भोजन एक दिन के लिए भी न रुके।

LPG की आपूर्ति पर 'वॉर रूम' जैसी तैयारी

निदेशालय ने साफ कर दिया है कि अब खाना लकड़ी पर नहीं, बल्कि आधुनिक तरीके से एलपीजी पर ही बनेगा। इसके लिए भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ सीधे स्तर पर बात की गई है। इंडियन ऑयल ने 'प्राथमिकता' के आधार पर स्कूलों को गैस सिलेंडर देने का वादा किया है, जिससे अब ईंधन की किल्लत का बहाना नहीं चलेगा।

स्टॉक की कमी का डर खत्म: तेल कंपनियों का बड़ा दावा

गैस की किल्लत की अफवाहों पर लगाम लगाते हुए निदेशक ने बताया कि राज्य में एलपीजी स्टॉक की कोई कमी नहीं है। सभी 38 जिलों को निर्देश दिया गया है कि वे आपूर्ति श्रृंखला को टूटने न दें। तेल कंपनियों ने लिखित आश्वासन दिया है कि स्कूलों के लिए सिलेंडरों का कोटा हमेशा फुल रहेगा, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ पोषण की गाड़ी भी दौड़ती रहे।

इमरजेंसी प्लान: जब गैस खत्म हो जाए, तब क्या?

अगर किसी बेहद आकस्मिक स्थिति में एलपीजी खत्म हो जाती है, तो क्या बच्चे भूखे रहेंगे? जवाब है—बिल्कुल नहीं। विभाग ने 'प्लान-बी' के तहत पुरानी वैकल्पिक व्यवस्था को एक्टिव रखा है। ऐसी स्थिति में स्कूल को लकड़ी का उपयोग कर खाना बनाना होगा, लेकिन यह केवल 'रेयर ऑफ द रेस्ट' मामलों में ही मान्य होगा।

विभाग की दो-टूक: लकड़ी विकल्प है, निर्देश नहीं

अंत में, निदेशक ने एक बड़ा भ्रम दूर किया। उन्होंने कहा कि मुख्यालय ने कहीं भी लकड़ी से खाना पकाने का नया आदेश नहीं दिया है। यह सिर्फ एक आपातकालीन व्यवस्था है जो पहले से मौजूद है। प्राथमिक लक्ष्य धुआं-मुक्त रसोई और समय पर भोजन है। जो भी अधिकारी इस सप्लाई चेन में कोताही बरतेगा, उस पर सख्त कार्रवाई तय है।