डिजिटल शिक्षा में बिहार फिसड्डी, स्मार्ट क्लास का सपना अधूरा, कोई जिला 50 में 20 अंक भी नहीं ला सका, नालंदा अव्वल तो पटना पायदान में नीचे

Bihar Digital Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का सपना अभी हकीकत से काफी दूर दिखाई दे रहा है।...

Bihar Lags in Digital Education Nalanda Tops Patna below PGI
डिजिटल शिक्षा में बिहार फिसड्डी- फोटो : social Media

Bihar Digital Education: बिहार के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का सपना अभी हकीकत से काफी दूर दिखाई दे रहा है। शिक्षा मंत्रालय की जिला प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट ने सूबे की स्कूली शिक्षा की ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसने डिजिटल शिक्षा के दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के किसी भी जिले को डिजिटल लर्निंग श्रेणी में 50 में से 20 अंक तक नहीं मिल सके। यानी स्मार्ट क्लास, हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर लैब और तकनीक आधारित पढ़ाई का विस्तार अब भी बेहद सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

हालांकि ओवरऑल प्रदर्शन में बिहार के कई जिलों ने सुधार दर्ज किया है। 311 अंकों के साथ नालंदा राज्य में पहले और 309 अंकों के साथ शेखपुरा दूसरे स्थान पर रहा। दोनों जिले प्रचेष्टा-1 श्रेणी में शामिल हुए हैं। वहीं मुंगेर और पटना को 288-288 अंक मिले, जबकि भागलपुर ने 23वें स्थान से छलांग लगाकर 17वां स्थान हासिल किया और उसका कुल स्कोर 262 से बढ़कर 275 अंक पहुंच गया।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ज्यादा फ़िक्रअंगेज़ है। राजधानी पटना भी इस मामले में पीछे रह गई। डिजिटल लर्निंग में उसे सिर्फ 12 अंक मिले, जबकि नालंदा को 15 और शेखपुरा को 16 अंक प्राप्त हुए। लर्निंग आउटकम में पटना ने 290 में 154 अंक हासिल कर नालंदा की बराबरी की, लेकिन बुनियादी ढांचे, डिजिटल संसाधनों और स्कूल सुरक्षा जैसे पैमानों पर कम अंक मिलने के कारण वह शीर्ष स्थान हासिल नहीं कर सका।रिपोर्ट के अनुसार अररिया 223 अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर रहा, जबकि सीतामढ़ी और मधुबनी को 225-225 अंक मिले। राज्य का कोई भी जिला अभी शिक्षा मंत्रालय की उत्तम या उससे ऊपर की श्रेणी तक नहीं पहुंच पाया है। अधिकांश जिले अब भी प्रचेष्टा-2 और प्रचेष्टा-3 श्रेणियों में हैं।भागलपुर को डिजिटल लर्निंग में सिर्फ 13 अंक मिले और हैरानी की बात यह है कि पिछले साल भी उसका स्कोर इतना ही था। यानी एक साल में डिजिटल शिक्षा के मोर्चे पर कोई सुधार नहीं हुआ। स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण के क्षेत्र में भी भागलपुर को 35 में केवल 11 अंक मिले, जो इस क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर करता है।

यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ़्तार सुस्त है। जब तक सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास, इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटर लैब और तकनीक आधारित शिक्षण का दायरा नहीं बढ़ेगा, तब तक नई शिक्षा नीति के डिजिटल विज़न को ज़मीन पर उतारना मुश्किल रहेगा। यही वजह है कि डिजिटल तालीम आज भी बिहार की स्कूली शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।