प्रधान शिक्षकों की मनमानी पर लगाम: मेरिट से कम नंबर फिर भी चाहिए मनचाहा प्रखंड? शिक्षा विभाग ने शिक्षिका का दावा किया खारिज
बीपीएससी (BPSC) से चयनित प्रधान शिक्षकों के पदस्थापन में 'पहुंच' और 'पसंद' का खेल खत्म हो गया है। पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर हुई सुनवाई के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पदस्थापन केवल मेरिट और कट-ऑफ के आधार पर ही होगा, न कि व्यक्तिगत इच्
Patna - बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने शोभा कुमारी बनाम राज्य सरकार मामले में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश का अनुपालन करते हुए अपना निर्णय सुनाया है । विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ० बी. सजेन्दर ने याचिकाकर्ता शोभा कुमारी के लंबित अभ्यावेदन पर सुनवाई करने के बाद सकारण आदेश (संख्या-1066) निर्गत किया है । इस मामले में विभाग ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति और पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता और नियमों के अधीन संपन्न हुई है ।
पदस्थापन विवाद: मनचाहा प्रखंड न मिलने पर जताई थी आपत्ति
याचिकाकर्ता शोभा कुमारी बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की विज्ञापन संख्या-25/2024 के जरिए प्रधान शिक्षक के पद पर सफल हुई थीं । उन्हें पटना जिला आवंटित किया गया था, जहाँ उन्होंने पदस्थापन के लिए तीन विकल्पों—पटना सदर, फुलवारी शरीफ और दानापुर की मांग की थी । हालांकि, इन तीनों प्रखंडों के बजाय उन्हें धनरूआ प्रखंड आवंटित कर दिया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और अपने पसंदीदा विकल्प वाले प्रखंड में स्थानांतरण की मांग की थी ।
जांच में खुलासा: मेरिट और कट-ऑफ के आधार पर हुआ आवंटन
विभाग ने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से इस आवंटन की विस्तृत जांच करवाई । जांच में पाया गया कि सफल अभ्यर्थियों को 'Merit-Cum-Choice' के आधार पर सॉफ्टवेयर के जरिए विद्यालय आवंटित किए गए थे । शोभा कुमारी का बीसी (BC) श्रेणी में वरीयता क्रमांक 49179 था । उनके द्वारा मांगे गए प्रखंडों—पटना सदर अरबन, फुलवारी शरीफ और दानापुर में बीसी श्रेणी का कट-ऑफ क्रमशः 45909, 18634 और 23787 गया था ।
क्यों खारिज हुआ दावेदारी का आधार?
चूंकि याचिकाकर्ता का वरीयता क्रमांक इन प्रखंडों के निर्धारित कट-ऑफ से काफी बाहर था, इसलिए उन्हें सॉफ्टवेयर द्वारा उनकी मेरिट के अनुसार धनरूआ प्रखंड आवंटित हुआ । विभाग ने अपनी दलील में कहा कि पदस्थापन की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं हुआ है और कट-ऑफ के नियमों का पूर्ण पालन किया गया है । वर्तमान में शोभा कुमारी धनरूआ प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय, महुआबाग में अपना योगदान देकर कार्य कर रही हैं ।
नियमावली का हवाला: स्थानांतरण को अधिकार के रूप में नहीं मांग सकते
अपने अंतिम फैसले में शिक्षा विभाग ने 'बिहार प्रारंभिक विद्यालय प्रधान शिक्षक नियमावली, 2024' के नियम 7(4) का हवाला दिया है । विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रधान शिक्षकों के स्थानांतरण की सुविधा का दावा अधिकार के रूप में नहीं किया जा सकता है । प्रशासी विभाग के पास यह शक्ति है कि वह आवश्यक परिस्थितियों के आधार पर ऐसे अनुरोधों को अस्वीकार कर सके । इन्ही तथ्यों के आलोक में डॉ० बी. सजेन्दर ने याचिकाकर्ता के दावे को अस्वीकृत करते हुए मामले को समाप्त कर दिया है ।