बिहार मॉडल का विदेशी मुरीद: लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मिली 'जीविका' और बिजली क्षेत्र के सुधारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) में आयोजित कार्यशाला में बिहार के बिजली क्षेत्र और 'जीविका' जैसे सामुदायिक विकास मॉडलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। NBPDCL के एमडी राहुल कुमार ने राज्य की विकास यात्रा प्रस्तुत की।
Patna - : बिहार के शासन सुधार और ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलावों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित संस्थान लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पोलिटिकल साइंस (LSE) में आयोजित “बिहार लोक नीति दिवस” कार्यशाला में बिहार के विकास मॉडल की जमकर सराहना की गई। 2-3 मार्च 2026 को आयोजित इस विशेष सत्र में विशेषज्ञों ने माना कि बिहार ने बिजली और सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो काम किया है, वह विकासशील देशों के लिए एक मिसाल है।
बिजली की किल्लत से 'स्मार्ट मीटर' तक का सफर
कार्यशाला में बिहार का पक्ष रखते हुए NBPDCL और BSPTCL के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार (IAS) ने राज्य की विद्युत परिवर्तन यात्रा पर विस्तार से अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कैसे बिहार ने बिजली की भारी कमी वाले राज्य की छवि को तोड़ते हुए लगभग शत-प्रतिशत घरेलू विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया। राहुल कुमार ने वितरण दक्षता बढ़ाने, भविष्य के लिए तैयार नेटवर्क निर्माण और स्मार्ट मीटरिंग के सफल विस्तार जैसे तकनीकी सुधारों पर वैश्विक शिक्षाविदों का ध्यान आकर्षित किया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी बिजली
तीन अलग-अलग सत्रों में अपनी बात रखते हुए प्रबंध निदेशक ने कहा कि विश्वसनीय बिजली आपूर्ति केवल रोशनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने बिहार में ग्रामीण उद्यमों, कृषि उत्पादकता और स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार लाया है। उन्होंने रेखांकित किया कि बिजली पहुंचने से ग्रामीण इलाकों में आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं और शिक्षा तक पहुंच आसान हुई है, जिससे सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है।
'जीविका' मॉडल की वैश्विक गूंज
अपने पूर्व के ग्रामीण विकास अनुभवों को साझा करते हुए राहुल कुमार ने बिहार के प्रसिद्ध 'जीविका' (स्वयं सहायता समूह) मॉडल की भी चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नीति विशेषज्ञों को बताया कि कैसे लाखों ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया है। जमीनी स्तर पर सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करने के इस सफल उदाहरण की एलएसई (LSE) के शासन अध्ययन विभाग ने सराहना की।
वैश्विक मंच पर बढ़ती बिहार की साख
ऊर्जा विभाग के सचिव और BSPHCL के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह (IAS) ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नीति संवादों में बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों की यह भागीदारी राज्य के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है। उन्होंने जोर दिया कि बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी आधारित शासन (Tech-based Governance) के माध्यम से बिहार ने यह साबित किया है कि समावेशी विकास को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।