Vande Bharat Sleeper:अब वंदे भारत स्लीपर-अमृत भारत टिकट कैंसिल करने पर होगा बड़ा नुकसान, रेलवे ने बदले नियम, यात्रा से पहले जान लें रेल मंत्रालय का सख्त फैसला
Vande Bharat Sleeper: रेल मंत्रालय ने वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत-2 ट्रेनों को लेकर ऐसा क़दम उठाया है, जिसने यात्रियों की सहूलियत से ज़्यादा सिस्टम की सख़्ती को तरजीह देने का साफ़ पैग़ाम दे दिया है।
Vande Bharat Sleeper: रेल मंत्रालय ने वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत-2 ट्रेनों को लेकर ऐसा क़दम उठाया है, जिसने यात्रियों की सहूलियत से ज़्यादा सिस्टम की सख़्ती को तरजीह देने का साफ़ पैग़ाम दे दिया है। 16 जनवरी को जारी नई अधिसूचना के तहत इन प्रीमियम ट्रेनों में टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों को पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त कर दिया गया है। अब अगर कोई यात्री ट्रेन के तय प्रस्थान समय से आठ घंटे से कम समय पहले अपना कंफर्म टिकट रद्द कराता है, तो उसे एक रुपया भी वापस नहीं मिलेगा।
अब तक आम ट्रेनों में यह सीमा चार घंटे की थी, लेकिन रेल मंत्रालय ने रेल यात्री नियम, 2015 में संशोधन कर इन नई चमचमाती ट्रेनों के लिए अलग और कड़े उसूल लागू कर दिए हैं। यह फ़ैसला “सुविधा से पहले अनुशासन” की नीति को आगे बढ़ाता है।
रेलवे का तर्क है कि वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत-2 की बुनियादी ख़ासियत ही इन्हें अलग बनाती है। इन ट्रेनों में हर यात्री को कंफर्म बर्थ की गारंटी दी जाती है। या तो पूरे परिवार को जगह मिलेगी या किसी को भी नहीं। ऐसे में आख़िरी वक़्त पर टिकट रद्द होने से बर्थ दोबारा भरना मुश्किल हो जाता है और ट्रेनें आधी खाली चलती हैं। यही घाटा रेलवे को नागवार गुजर रहा था।
नई व्यवस्था के तहत अगर कोई यात्री यात्रा से 72 घंटे पहले भी कंफर्म टिकट रद्द करता है, तो उसे कम से कम 25 प्रतिशत किराया कैंसिलेशन चार्ज के रूप में चुकाना होगा। पहले सामान्य ट्रेनों में एक तय न्यूनतम राशि काटी जाती थी, जो किराए के मुक़ाबले मामूली होती थी। अब प्रीमियम ट्रेन है तो नियम भी प्रीमियम होंगे रेल मंत्रालय का यही रुख़ है।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इन ट्रेनों में रिफंड की खिड़की यात्रा से पूरे आठ घंटे पहले ही बंद हो जाएगी। यानी आख़िरी घड़ी में लिया गया फ़ैसला सीधे जेब पर भारी पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में शुरू की गई एक जोड़ी वंदे भारत स्लीपर और नौ जोड़ी अमृत भारत-2 ट्रेनों पर ये नियम तत्काल लागू कर दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, रेल मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि ये ट्रेनें सिर्फ़ तेज़ और आरामदेह ही नहीं, बल्कि नियमों में भी सख़्त हैं। अब यात्रियों को टिकट बुक करते वक़्त “जल्दबाज़ी नहीं, तजवीज़” से काम लेना होगा, वरना सहूलियत की जगह नुक़सान उनका इंतज़ार कर रहा होगा।