Nitish neighbor Lalu: सियासत का नया पड़ोस, सीएम कुर्सी छोड़ते ही लालू यादव के पड़ोसी बन सकते हैं नीतीश कुमार, पटना की राजनीति में शुरू होगी नई कहानी

बिहार की सियासत में एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार पटना की राजनीतिक गलियों में अपना मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार पटना की राजनीतिक गलियों में अपना नया ठिकाना बदल सकते हैं।...

Nitish Kumar May Soon Be Lalu Yadav Neighbor
लालू यादव के पड़ोसी बन सकते हैं नीतीश कुमार- फोटो : social Media

Nitish neighbor Lalu: बिहार की सियासत में एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नीतीश कुमार पटना की राजनीतिक गलियों में अपना नया ठिकाना बदल सकते हैं। खबर है कि वह लंबे समय से सत्ता का केंद्र रहे 1 अणे मार्ग को छोड़कर 7 सर्कुलर रोड में शिफ्ट होने की तैयारी में हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलेगा, क्योंकि 7 सर्कुलर रोड में रहने पर वह राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव के पड़ोसी बन जाएंगे।

दरअसल, 7 सर्कुलर रोड और राबड़ी आवास के बीच की दूरी महज़ करीब 200 मीटर बताई जा रही है। यानी सियासत के दो पुराने किरदार अब लगभग एक ही मोहल्ले में दिखाई दे सकते हैं। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है और इसे बिहार की राजनीति में नई भूमिका की शुरुआत माना जा रहा है।हालांकि बिहार में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला देने का नियम अब नहीं है। पहले ऐसी व्यवस्था थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस पर रोक लग गई। फिर भी सरकार चाहे तो पूर्व मुख्यमंत्री को किराये पर आवास उपलब्ध करा सकती है।

करीब 19 सालों तक 1 अणे मार्ग बिहार की सत्ता का असली केंद्र रहा है। यहीं से नीतीश कुमार ने प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक रणनीतियों को दिशा दी। अब यदि वह राज्यसभा की राह पकड़ते हैं, तो दिल्ली में केंद्र सरकार की ओर से उन्हें आधिकारिक आवास मिल जाएगा। लेकिन पटना में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए वह 7 सर्कुलर रोड को ही अपना ठिकाना बना सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 7 सर्कुलर रोड का यह बंगला खुद नीतीश कुमार की देखरेख में तैयार हुआ था। इस भवन को भूकंप रोधी तकनीक से बनाया गया है, ताकि तेज झटकों को भी झेल सके। इसके विशाल लॉन में खास तौर पर कोलकाता से मंगाकर घास लगाई गई थी, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।राजनीतिक इतिहास देखें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था और जीतन राम मांझी को सत्ता सौंपी थी, तब वह इसी 7 सर्कुलर रोड में रहने आ गए थे। बाद में इसी बंगले से उन्होंने सियासी रणनीति बनाते हुए सत्ता में वापसी की और 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर दोबारा मुख्यमंत्री बने।

अब अगर नीतीश कुमार फिर से 7 सर्कुलर रोड का रुख करते हैं,तो पटना की सियासत में यह सिर्फ घर बदलने की कहानी नहीं होगी, बल्कि सत्ता के नए समीकरणों की शुरुआत भी मानी जा सकती है।