अनोखी परंपरा: अरब में चांद दिखा तो बिहार के बड़ाकर गांव में हुई ईद,नमाज के बाद दी गई मुबारकबाद

बिहार के इस जिले के एक गांव में मुस्लिम समुदाय ने अरब देशों में चांद दिखने के आधार पर शुक्रवार को ही ईद मनाई. दरअसल इस गाव में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत लोग ईद मनाते हैं. ईद कि नमाज़ अता करने के बाद लोगों ने गले लगकर एक-दूसरे की बधाइयां दीं.

अनोखी परंपरा: अरब में चांद दिखा तो बिहार के बड़ाकर गांव में ह
अरब में चांद दिखा तो बिहार के बड़ाकर गांव में हुई ईद- फोटो : news 4 nation

बिहार के नालंदा जिले के बड़ाकर गांव में मुस्लिम समुदाय ने पूरे देश से एक दिन पहले ही शुक्रवार को ईद का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया। वर्षों पुरानी इस अनूठी परंपरा को जीवित रखते हुए रोजेदारों ने शुक्रवार सुबह ईदगाह में नमाज अदा की। नमाज के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और क्षेत्र में सुख, समृद्धि तथा आपसी भाईचारे की दुआ मांगी।

चांद को लेकर गांव वालों का तर्क

इस गांव के लोगों का तर्क है कि चांद पूरी दुनिया के लिए एक ही है, इसलिए इसे भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। ग्रामीणों का मानना है कि यदि अरब देशों (खाड़ी देशों) में चांद दिखाई दे गया है, तो वह पूरी कायनात के लिए मान्य होना चाहिए। इसी सिद्धांत के आधार पर यहां के लोग सऊदी अरब में चांद दिखने के साथ ही अपना रोजा संपन्न कर ईद मना लेते हैं।

आधुनिक तकनीक और धार्मिक विश्वास

ग्रामीणों का कहना है कि आज के आधुनिक युग में सूचनाएं पल भर में मिल जाती हैं, जिससे इस परंपरा को निभाने में आसानी होती है। स्थानीय निवासी मोहम्मद तारिक अनवर के अनुसार, इंसान भले ही दुनिया को अलग-अलग इलाकों में बांट दे, लेकिन अल्लाह एक है। उनके मुताबिक, यदि दुनिया के किसी भी हिस्से में चांद नजर आता है, तो वह पूरी दुनिया के लिए ईद का संदेश लेकर आता है।

वैश्विक शांति के लिए प्रार्थना

त्योहार के इस पावन अवसर पर ग्रामीणों ने खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और संघर्ष पर भी चिंता व्यक्त की। जहां भारत में लोग शांतिपूर्ण ढंग से त्योहार मना रहे हैं, वहीं गांव वालों ने अल्लाह से दुआ मांगी कि युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भी शांति बहाल हो। बड़ाकर गांव की यह ईद न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आपसी सद्भाव और वैश्विक भाईचारे का प्रतीक भी बनकर उभरी है।