Bihar News : शिक्षा के मंदिर में 'रीलबाजी', स्कूल परिसर में भोजपुरी गाने पर महिला का वीडियो वायरल, उठ रहे गंभीर सवाल

Bihar News : शिक्षा के मंदिर में 'रीलबाजी', स्कूल परिसर में

MUZAFFARPUR : विद्यालय को ज्ञान और संस्कार का मंदिर माना जाता है, लेकिन आज के दौर में सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध होने की होड़ ने इस मर्यादा को दांव पर लगा दिया है। ताजा मामला मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड से सामने आया है, जहां राजकीय मध्य विद्यालय 'महंथ मनियारी' के परिसर में एक महिला द्वारा भोजपुरी गाने पर रील बनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि 'News4Nation' नहीं करता है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल की अनुशासनहीनता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

भोजपुरी गानों पर ठुमके और स्कूल की मर्यादा

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक महिला स्कूल के प्रांगण का उपयोग अपनी रील शूट करने के लिए कर रही है। वह भोजपुरी गानों पर थिरकती नजर आ रही है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर बच्चे अपना भविष्य गढ़ने आते हैं और जहां अनुशासन की सीख दी जाती है, वहां इस तरह की 'रीलबाजी' कतई स्वीकार्य नहीं है। यह कृत्य न केवल विद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी भेजता है।

क्या अपनी लोकप्रियता के लिए शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करना जायज है?

आजकल रील बनाने का जुनून इस कदर हावी है कि लोग स्थान की पवित्रता और मर्यादा को भूलते जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या केवल चंद लाइक्स और व्यूज के लिए शिक्षा के मंदिर को इस तरह शर्मसार करना सही है? स्कूल परिसर में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश और वहां अश्लील गानों पर फिल्मांकन करना विद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। आखिर किसके आदेश या ढिलाई की वजह से स्कूल परिसर का उपयोग मनोरंजन के इस स्तर के लिए किया गया?

कानूनी प्रावधानों और रोक की आवश्यकता

इस तरह की बढ़ती घटनाओं के बाद अब यह मांग उठने लगी है कि क्या रिलबाजों के लिए कोई सख्त कानूनी प्रावधान होने चाहिए? सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट नियमावली की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में स्कूलों का शैक्षणिक वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।

सोशल मीडिया का दुरुपयोग और गिरता स्तर

सोशल मीडिया जहां सूचनाओं के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है, वहीं इसका दुरुपयोग भी बढ़ रहा है। मुजफ्फरपुर की यह घटना महज एक बानगी है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल सामाजिक संस्थाओं की गरिमा को कम कर रहा है। वायरल वीडियो के बाद अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और संबंधित विद्यालय के प्रबंधन पर क्या कार्रवाई की जाती है, ताकि भविष्य में शिक्षा के मंदिर में ऐसी अमर्यादित हरकतें दोबारा न हों।

मणिभूषण की रिपोर्ट