Bihar News : मुंगेर मंडल कारा में बंदी की हालत बिगड़ी, परिजनों ने शरीर पर चोट के निशान और कंधा टूटने का लगाया आरोप

Bihar News : मुंगेर मंडल कारा में बंद एक बंदी की संदिग्ध हालत में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

Bihar News : मुंगेर मंडल कारा में बंदी की हालत बिगड़ी, परिजन
कैदी को लगी चोट - फोटो : IMTIYAZ

MUNGER : मुंगेर मंडल कारा से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बंद एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। अस्पताल पहुंचे परिजनों ने जब बंदी को देखा, तो उसके शरीर पर चोट के कई गंभीर निशान थे और उसका बायां कंधा भी टूटा हुआ पाया गया। इस स्थिति को देखकर परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए किसी अनहोनी की आशंका जताई है। दूसरी ओर, जेल और अस्पताल प्रशासन ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बंदी को एक गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घायल बंदी की पहचान रूपेश कुमार के रूप में हुई है, जो कासिम बाजार थाना क्षेत्र के विंडवाड़ा का रहने वाला है। रूपेश को शराब के एक मामले में गिरफ्तार कर 4 जून को जेल भेजा गया था। फिलहाल, सदर अस्पताल के आईसीयू में पुलिस कस्टडी के बीच उसका इलाज चल रहा है। खुद घायल बंदी रूपेश कुमार ने इस मामले में उलझाने वाला बयान दिया है; उसका कहना है कि जेल जाने के बाद उसे कोई दवा दी गई थी, जिसके बाद वह बेहोशी जैसी हालत में चला गया और उसे कुछ याद नहीं कि उसके साथ क्या हुआ। हालांकि, उसने किसी के द्वारा मारपीट किए जाने की बात से इनकार किया है, लेकिन वह यह भी नहीं बता पा रहा कि उसके शरीर पर चोटें कैसे आईं और कंधा कैसे टूटा।

इस पूरे घटनाक्रम पर बंदी की पत्नी ने जेल प्रशासन की थ्योरी को चुनौती दी है। पत्नी का साफ कहना है कि जब उसके पति को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था, तब वह पूरी तरह स्वस्थ और ठीक-ठाक थे। लेकिन अब अस्पताल में उनके हाथ-पैर पर चोट के गहरे निशान दिख रहे हैं और बायां कंधा भी फ्रैक्चर है, जो बिना किसी बर्बरता या भारी चोट के संभव नहीं है। पीड़ित परिवार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और बंदी को बेहतर इलाज मुहैया कराने की गुहार लगाई है।

इधर, मामले के तूल पकड़ते ही जेल अधीक्षक किरण निधि ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि बंदी के साथ जेल में कोई मारपीट नहीं हुई है। जेल प्रशासन के मुताबिक, रूपेश कुमार 'एंटी विड्रॉल सिंड्रोम' (अचानक शराब छोड़ने के कारण होने वाली शारीरिक व मानसिक समस्या) नाम की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। डॉक्टरों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि अत्यधिक शराब पीने का आदी होने के कारण, अचानक शराब बंद होने से उसे बार-बार मिर्गी  के दौरे पड़ रहे हैं। 4 जून को जेल लाते समय भी वह गेट पर ही गिर गया था, और बार-बार गिरने के कारण ही उसके बाएं हाथ में क्रैक आया है। इसके अलावा अत्यधिक शराब के सेवन से उसका लीवर डैमेज हो चुका है और उसमें पीलिया  के लक्षण भी मिले हैं।

वहीँ जेल प्रशासन ने कहा की "बंदी मिर्गी की बीमारी से ग्रसित है। बार-बार बेहोश होकर गिरने के कारण उसे यह चोटें आई हैं। 5 जून को प्राथमिक उपचार के बाद उसे अस्पताल भेजा गया था और स्थिति बिगड़ने पर 10 जून को दोबारा आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं।" जेल अधीक्षक के इन दावों और परिजनों द्वारा उठाए गए तीखे सवालों के बाद अब जिले में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और सस्पेंस बना हुआ है। सच बीमारी है या कस्टोडियल टॉर्चर, यह तो जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल बंदी की हालत नाजुक बनी हुई है और सदर अस्पताल के आईसीयू में उसका इलाज जारी है।

इम्तियाज़ की रिपोर्ट