Bihar News : घर से 40 किलोमीटर दूर स्कूल, एडमिशन से पहले बनने लगी हाजिरी, अपराधी को नाबालिग बनाने के खेल का हुआ खुलासा

Bihar News : घर से 40 किलोमीटर दूर स्कूल, एडमिशन से पहले बनन

MOTIHARI : बिहार के मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) में शिक्षा विभाग का एक 'गजब' कारनामा सामने आया है, जहाँ रिश्वत और सेटिंग के खेल में एक शातिर अपराधी को नाबालिग घोषित कराने की साजिश रची गई। मामला पहाड़पुर प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय 'सरेया बाजार' का है, जहाँ स्कूल प्रबंधन ने कागजों में ऐसा हेरफेर किया कि जांच अधिकारी भी दंग रह गए। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब किशोर न्याय परिषद (JJB) ने स्कूल के दस्तावेजों और हाजिरी रजिस्टर की सूक्ष्म जांच की।

दरअसल, चिरैया थाना क्षेत्र के एक गंभीर मामले (कांड संख्या 373/23) के आरोपी प्रीतम कुमार को नाबालिग साबित करने के लिए उसकी मां ने अदालत में एक शपथपत्र और स्कूल का प्रमाणपत्र पेश किया था। संदेह होने पर किशोर न्याय परिषद के लिपिक मोहम्मद शहीद ने जब स्कूल के प्रधानाध्यापक को रिकॉर्ड के साथ तलब किया, तो जालसाजी की परतें खुलती चली गईं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से सुगौली थाना क्षेत्र का रहने वाला है, लेकिन उसका नामांकन 40 किलोमीटर दूर पहाड़पुर के स्कूल में दिखाया गया था।

इस फर्जीवाड़े में सबसे हैरान करने वाला पहलू 'बैकडेट' उपस्थिति का है। स्कूल के रिकॉर्ड के मुताबिक, छात्र का नामांकन 20 जुलाई 2016 को दिखाया गया है, लेकिन उसकी हाजिरी (उपस्थिति) अप्रैल 2016 से ही रजिस्टर में दर्ज होने लगी थी। यानी बच्चे के स्कूल आने से तीन महीने पहले ही उसे उपस्थित दिखा दिया गया। इसके अलावा, टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) के क्रम में भी भारी विसंगति पाई गई; सामान्य क्रम को तोड़कर एक विशेष नंबर वाली टीसी जारी की गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है।

दस्तावेजों के अवलोकन में यह भी पाया गया कि रजिस्टर और प्रमाणपत्रों में अलग-अलग कलम और लिखावट (हैंडराइटिंग) का इस्तेमाल किया गया है, जो साबित करता है कि रिकॉर्ड के साथ बाद में छेड़छाड़ की गई। इस गंभीर मामले को देखते हुए किशोर न्याय परिषद के लिपिक ने नगर थाना में आरोपी के परिजनों और विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक सहित अन्य दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है। चर्चा है कि विभाग में 'चढ़ावे' के बदले किसी भी अपराधी का इतिहास बदलना यहाँ मुमकिन हो गया है।

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि यदि इस फर्जी प्रमाणपत्र रैकेट की गहराई से जांच की जाए, तो एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। यह पहली बार नहीं है जब अपराधियों को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए उन्हें 'नाबालिग' बनाने का खेल खेला गया हो, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। फिलहाल, पुलिस इस मामले में शामिल शिक्षा विभाग के सफेदपोश चेहरों की तलाश कर रही है।

हिमांशु की रिपोर्ट