जंगल का बाशिंदा पटरी पर हारा जिंदगी की जंग, ट्रेन की चपेट में आने से भालू की मौत, दो घंटे ठप रहा रेल परिचालन, वंदे भारत समेत कई ट्रेनें रहीं प्रभावित

गपोी ळाैेछ जंगल से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे एक जंगली भालू की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई।

Bear killed after being hit by train rail operations disrupt
जंगल का बाशिंदा पटरी पर हारा जिंदगी की जंग- फोटो : reporter

Bettiah: वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से सटे रेलखंड पर सोमवार की अहले सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया। जंगल से निकलकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे एक जंगली भालू की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद रेलवे और वन विभाग में हड़कंप मच गया। करीब दो घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा और कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा।

यह घटना वाल्मीकिनगर–पनियहवा रेलखंड पर वाल्मीकिनगर और पनियहवा स्टेशन के बीच अड़गणना टोला के समीप भापसा नदी पर बने रेलवे पुल संख्या-357 के पास हुई। बताया जा रहा है कि सुबह के समय भालू रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया और उसी दौरान किसी तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि भालू की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

हादसे के बाद रेलवे कर्मियों ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। ट्रैक पर वन्यजीव का शव पड़े होने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया। इस दौरान वंदे भारत एक्सप्रेस, अंत्योदय एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा।घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वनपाल राजेश रोशन, वनरक्षी सुजीत कुमार और पशु चिकित्सक डॉ. संजीव रंजन कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।

काफी मशक्कत के बाद भालू के शव को रेलवे ट्रैक से हटाया गया। इसके बाद रेल परिचालन को धीरे-धीरे बहाल किया गया और यात्रियों ने राहत की सांस ली।मदनपुर वन क्षेत्र पदाधिकारी नसीम अहमद अंसारी ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि भालू किस ट्रेन की चपेट में आया। मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद वन्यजीव संरक्षण नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वीटीआर क्षेत्र से गुजरने वाले इस रेलखंड पर वन्यजीवों के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ताजा घटना ने एक बार फिर जंगल और रेलवे ट्रैक के बीच बढ़ते टकराव की चिंता बढ़ा दी है।वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल क्षेत्र से गुजरने वाले रेल मार्गों पर विशेष निगरानी व्यवस्था जरूरी है। संवेदनशील इलाकों में ट्रेनों की रफ्तार नियंत्रित करना, वन्यजीवों के मूवमेंट पर नजर रखना और रेलवे-वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल बनाना समय की मांग है।भालू की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास की रफ्तार के बीच जंगल के इन बेजुबान जीवों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। वीटीआर जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को रोकना अब वन विभाग और रेलवे दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार