Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा में मौत का तांडव, पंडाल में भगदड़ से 20 की मौत , 45 से ज्यादा जख्मी

Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता में दुर्गा पूजा की खुशियां चीख-पुकार और मातम में बदल गईं, कोलकाता मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने 20 लोगों की मौत और 45 से ज्यादा लोगों के घायल होने का दावा किया।

Kolkata Durga Puja Stampede
कोलकाता दुर्गा पूजा में मौत का तांडव- फोटो : social Media

Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा की खुशियां उस वक्त चीख-पुकार और मातम में बदल गईं, जब शनिवार शाम चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मच गई। महासप्तमी के मौके पर माता के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के बीच अचानक अफरा-तफरी फैल गई। हादसे में मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती जानकारी में 19 लोगों की मौत की बात कही गई, जबकि कोलकाता मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने 20 लोगों की मौत और 45 से ज्यादा लोगों के घायल होने का दावा किया। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, मृतकों और घायलों की अंतिम आधिकारिक संख्या की पुष्टि जरूरी है।

तेज बारिश, भीड़ का दबाव और फिर मची भगदड़

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, महासप्तमी पर चोरबागान पूजा पंडाल और उसके बाहर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए लोग पंडाल के भीतर घुसने लगे। प्रवेश की व्यवस्था सीमित होने के कारण अंदर जाने के लिए इंतजार कर रही भीड़ का दबाव लगातार बढ़ता गया।इसी अफरा-तफरी के बीच लकड़ी से बना पंडाल का एक हिस्सा ढह गया। इसके बाद भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटनास्थल पर जूते-चप्पल और पानी की बोतलें बिखरी पड़ी थीं। पंडाल के भीतर कई लोग जमीन पर बेसुध पड़े नजर आए। हालांकि, लकड़ी का ढांचा किन परिस्थितियों में गिरा, इसकी जांच की जा रही है।

सीटी और लाउडस्पीकर की घोषणा से बढ़ी अफरा-तफरी?

कोलकाता पुलिस के मुताबिक, शाम को बारिश के कारण बड़ी संख्या में लोग पंडाल के भीतर रुक गए थे। शाम करीब 7:40 बजे बाहर खड़ी भीड़ ने भी अंदर प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों के हवाले से बताया कि आयोजकों की ओर से लाउडस्पीकर पर की गई घोषणा और निजी सुरक्षा गार्डों के सीटी बजाने से प्रवेश के इंतजार में खड़े लोगों के बीच भगदड़ की स्थिति पैदा हुई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और विभिन्न परिस्थितियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

स्ट्रेचर तक नहीं मिला, घायलों को हाथों से उठाकर पहुंचाया अस्पताल

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का आलम था। स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर कुछ लोगों को हाथों से उठाकर ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। कोलकाता मेडिकल कॉलेज की मॉर्चुरी में शव रखे जाने की जानकारी सामने आई। शुरुआती विवरणों के मुताबिक, मृतकों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा बताई गई है। हादसे के बाद पंडाल की लाइटें बंद कर दी गईं और लोगों की एंट्री रोक दी गई। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के कुछ अन्य दुर्गा पूजा पंडाल भी बंद कराए जाने की खबर है।

पूजा समिति पर कार्रवाई, पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा

हादसे के बाद पूजा समिति और स्थानीय प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे। पंडाल से जुड़े पदाधिकारियों, निजी सुरक्षाकर्मियों और ड्यूटी पर तैनात कुछ लोगों को पुलिस हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति के महासचिव जयंत बनर्जी और कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारियों ने हादसे की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। आयोजन समिति से देवदीप अधिकारी भी जुड़े बताए जाते हैं, जो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भतीजे हैं। जोड़ासांको से भाजपा विधायक विजय ओझा पूजा समिति के अध्यक्ष हैं, जबकि उत्तर कोलकाता जिला भाजपा अध्यक्ष तमोघ्न घोष भी आयोजन से जुड़े हैं। इन राजनीतिक संबंधों के बीच हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

3,500 पंडालों वाले शहर में सुरक्षा पर सवाल

कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए लगभग 3,500 पंडाल बनाए गए हैं। ऐसे में चोरबागान की घटना ने भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी, प्रवेश नियंत्रण और अग्नि एवं आपदा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज्य सरकार ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है। हादसे की जांच के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्रवेश व्यवस्था सीमित थी, तो बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे? जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक हादसे के लिए कौन-सी चूक जिम्मेदार थी।