जंतर-मंतर से संसद तक CJP का हुंकार, बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए सांसद चंद्रशेखर आजाद, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आर-पार की लड़ाई का ऐलान, हाई अलर्ट पर दिल्ली

CJP Protest: दिल्ली का सियासी मंजर एक बार फिर गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अपना आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया है।

CJP Parliament Push Azad Sit In Escalates Political Row
जंतर-मंतर से संसद तक CJP का हुंकार- फोटो : reporter

CJP Protest: राजधानी दिल्ली का सियासी मंजर एक बार फिर गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अपना आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया है। सोमवार शाम दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन स्थल खाली कराए जाने के कुछ ही घंटों बाद प्रदर्शनकारी फिर बड़ी तादाद में लौट आए और देर रात तक सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों ने साफ अल्फाज़ में ऐलान किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह विरोध  थमने वाला नहीं है।उधर, छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में सांसद चंद्रशेखर आजाद भी संसद परिसर में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का इल्जाम लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जताई।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल अभिजीत दीपके ने इं कहा कि आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहेगा और संसद मार्च दोबारा किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जंतर-मंतर से पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं, जिनमें सबसे अहम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी समर्थकों ने संसद की ओर कूच किया था। दावा किया जा रहा है कि बीते 14 वर्षों में पहली बार प्रदर्शनकारियों की इतनी बड़ी भीड़ संसद के दरवाजे तक पहुंची। इससे पहले वर्ष 2012 में निर्भया कांड के विरोध के दौरान इस इलाके में इतने बड़े स्तर का जनआक्रोश देखने को मिला था। इस घटनाक्रम ने राजधानी की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

जंतर-मंतर पर दोबारा उमड़ी भीड़ और संसद मार्च के बाद दिल्ली पुलिस पूरी तरह चौकन्नी हो गई है। राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। सिंघु, टिकरी, औचंदी, धांसा, कापसहेड़ा और नजफगढ़ समेत कई बॉर्डर इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने-जाने वाले वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की गहन तलाशी ली जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सोमवार को हुई हिंसा जैसी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। राजधानी में सियासी सरगर्मी अपने उरूज पर है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और संसद मार्च का अगला दौर किस दिशा में जाता है।

दिल्ली से धीरज कुमार सिंह की रिपोर्ट